भरमौर | चम्बा
राजकीय डिग्री कॉलेज भरमौर में विज्ञान संकाय (B.Sc.) को यथावत बनाए रखने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि विज्ञान संकाय को बंद करने का सबसे अधिक प्रभाव जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, पर पड़ेगा।
जिला कांग्रेस कमेटी चम्बा के जिला सचिव संजीव ठाकुर तथा ग्राम पंचायत सन्चूईं की प्रधान तनुजा देवी ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी (ADM) भरमौर के माध्यम से सौंपते हुए विज्ञान संकाय को पूर्ववत जारी रखने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि भरमौर जैसे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्र में विज्ञान संकाय केवल एक शैक्षणिक सुविधा नहीं, बल्कि सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य का आधार है। उनका तर्क है कि किसी एक वर्ष में प्रवेश संख्या कम होने के आधार पर विज्ञान संकाय को समाप्त करना दूरदर्शी निर्णय नहीं माना जा सकता। वर्तमान में क्षेत्र के अनेक विद्यार्थी +1 और +2 कक्षाओं में विज्ञान विषयों का अध्ययन कर रहे हैं तथा आने वाले वर्षों में प्रवेश संख्या बढ़ने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से राजकीय डिग्री कॉलेज भरमौर का नया भवन निर्मित किया गया है। ऐसे में विज्ञान संकाय को समाप्त करना न केवल सरकारी निवेश की उपयोगिता पर प्रश्न खड़े करेगा, बल्कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से जुड़ी शैक्षणिक अपेक्षाओं के भी विपरीत होगा।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि कॉलेज में विज्ञान संकाय उपलब्ध नहीं रहेगा तो विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए चम्बा अथवा अन्य दूरस्थ क्षेत्रों का रुख करना पड़ेगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। विशेषकर छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है और कुछ विद्यार्थियों के बीच में ही पढ़ाई छोड़ने की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
ज्ञापन में प्रदेश सरकार से आग्रह किया गया है कि जनजातीय क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राजकीय डिग्री कॉलेज भरमौर में B.Sc. संकाय को यथावत रखा जाए। साथ ही विज्ञान संकाय के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक शिक्षकों, प्रयोगशालाओं तथा अन्य शैक्षणिक संसाधनों की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश में हाल के महीनों में कम छात्र संख्या वाले कुछ सरकारी महाविद्यालयों में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को बंद करने के निर्णय को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में विरोध देखने को मिला है। कुछ मामलों में सरकार ने अपने निर्णय में संशोधन भी किया है, जबकि अन्य मामलों को लेकर न्यायालय में सुनवाई जारी है।
अब भरमौर क्षेत्र के लोग भी उम्मीद जता रहे हैं कि सरकार विद्यार्थियों के व्यापक हितों, जनजातीय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों तथा शिक्षा की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी।

