PMGSY-IV के तहत भरमौर विधानसभा क्षेत्र को मिली ऐतिहासिक सौगात ने पूरे क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगा दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के अंतर्गत भरमौर और किलाड़ (किलर) डिवीजन में कुल 155.175 किलोमीटर सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के लिए लगभग ₹291.41 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। यह स्वीकृति न केवल सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगी।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भरमौर डिवीजन में 83.3 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के लिए करीब ₹130.18 करोड़, जबकि किलाड़ डिवीजन में 71.875 किलोमीटर सड़कों के लिए लगभग ₹161.23 करोड़ की लागत स्वीकृत की गई है। PMGSY-IV के तहत स्वीकृत ये सड़कें कई ऐसे गांवों को जोड़ेंगी, जो अब तक साल के अधिकांश समय सड़क सुविधा से वंचित रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि PMGSY-IV के माध्यम से बनने वाली ये सड़कें स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाएंगी। अब मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल तक पहुंचने में कम समय लगेगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि दूर-दराज़ गांवों के बच्चों के लिए स्कूल और कॉलेज तक आना-जाना सरल होगा।

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कृषि और बागवानी पर निर्भर भरमौर और पांगी क्षेत्र के लिए यह योजना बेहद अहम मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क से सेब, आलू, राजमा और अन्य कृषि उत्पादों को समय पर मंडियों तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, PMGSY-IV के तहत सड़क नेटवर्क मजबूत होने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि भरमौर के धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होगी।

इस ऐतिहासिक स्वीकृति पर भरमौर विधानसभा क्षेत्र की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी है। यह निर्णय “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करता है।

इस अवसर पर प्रेस नोट जारीकर्ता डॉ. जनक राज ने कहा,
“PMGSY-IV के तहत भरमौर विधानसभा क्षेत्र को मिली यह सौगात ऐतिहासिक है। इससे न केवल कनेक्टिविटी सुधरेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्रवासियों को विश्वास है कि स्वीकृत परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन होगा।

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी PMGSY-IV की इस स्वीकृति का स्वागत किया है। उनका मानना है कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे विकास की धमनियां होती हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क से आपातकालीन सेवाएं, जैसे एंबुलेंस और राहत कार्य, तेजी से संचालित किए जा सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, भरमौर और किलाड़ जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सड़क निर्माण एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इस स्तर पर वित्तीय स्वीकृति मिलना यह दर्शाता है कि सरकार हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में PMGSY-IV के तहत स्वीकृत ये सड़कें क्षेत्र की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।