Disaster Management Mock Exercise के तहत उपमंडल भरमौर में वनाग्नि, क्लाउडबर्स्ट और अन्य संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों का व्यापक परीक्षण किया गया। भरमौर प्रशासन द्वारा आयोजित इस बहु-विभागीय मॉक एक्सरसाइज का उद्देश्य आपदा प्रबंधन तंत्र की कार्यक्षमता, संसाधनों की उपलब्धता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय क्षमता का आकलन करना था।
प्रशासन द्वारा पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार आयोजित इस अभ्यास में पुलिस, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, आपदा मित्र स्वयंसेवकों तथा अन्य संबंधित एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मॉक एक्सरसाइज के दौरान आपदा की काल्पनिक परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का यथार्थपरक प्रदर्शन किया गया।
अभ्यास के दौरान वनाग्नि और क्लाउडबर्स्ट जैसे दो प्रमुख आपदा परिदृश्यों को केंद्र में रखा गया। इन परिस्थितियों में विभिन्न विभागों की प्रतिक्रिया क्षमता, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन निर्णय प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदाओं के समय नुकसान को कम करने और त्वरित राहत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वनाग्नि परिदृश्य में दिखाई गई त्वरित कार्रवाई
मॉक एक्सरसाइज के पहले चरण में जंगल में आग लगने की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। इस दौरान वन विभाग और अग्निशमन विभाग की टीमों ने आग पर नियंत्रण पाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। प्रभावित क्षेत्र की निगरानी, फायर लाइन निर्माण, आग को फैलने से रोकने के उपाय और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया गया।
वन अधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मी के मौसम के दौरान वनाग्नि की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में विभागीय समन्वय और समय पर प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक होती है। मॉक एक्सरसाइज के माध्यम से इन सभी पहलुओं को व्यावहारिक रूप से परखा गया।









क्लाउडबर्स्ट परिदृश्य में बचाव और राहत कार्यों का अभ्यास
अभ्यास के दूसरे चरण में क्लाउडबर्स्ट की काल्पनिक स्थिति निर्मित की गई। इस दौरान प्रभावित व्यक्तियों की खोज, सुरक्षित स्थानों पर निकासी, प्राथमिक उपचार, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री वितरण जैसी गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घायलों को प्राथमिक उपचार देने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। वहीं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और राहत शिविर संचालन की व्यवस्थाओं को परखा। इस दौरान संचार तंत्र की प्रभावशीलता का भी परीक्षण किया गया ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में सूचना का आदान-प्रदान तेजी से हो सके।
SOP के अनुसार हुआ विभागीय समन्वय
मॉक एक्सरसाइज के दौरान सभी विभागों ने निर्धारित Standard Operating Procedures (SOPs) के अनुरूप कार्य किया। अधिकारियों ने बताया कि आपदा के समय विभागों के बीच बेहतर समन्वय ही राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता की कुंजी होता है। अभ्यास के दौरान त्वरित निर्णय लेने, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और प्रभावित लोगों तक शीघ्र सहायता पहुंचाने की क्षमता का परीक्षण किया गया।
जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता पर भी जोर
इस अभ्यास का उद्देश्य केवल सरकारी तंत्र की तैयारियों का आकलन करना नहीं था, बल्कि आम नागरिकों में आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी था। मॉक एक्सरसाइज में आपदा मित्र स्वयंसेवकों, व्यापार मंडल और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने सामुदायिक सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया।
भरमौर प्रशासन ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जन-सहभागिता, जागरूकता और समय पर प्रतिक्रिया जन-धन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रशासन ने इस सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विभागों, स्वयंसेवी संगठनों, आपदा मित्रों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।
हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए ऐसे अभ्यास भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और स्थानीय समुदाय पूरी तरह तैयार रह सके।
