नई दिल्ली – भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत ने लोकसभा में चुनावी सुधारों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के वर्षभर के व्यवहार को लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संसदीय मर्यादाओं के विरुद्ध करार दिया। अपने स्पष्ट, आक्रामक और निर्भीक भाषण में कंगना ने कहा कि एक नए सांसद के रूप में उनका पहला वर्ष विपक्ष की लगातार अव्यवस्था, हंगामेबाज़ी और वेल में आकर सदन की कार्यवाही रोकने की कोशिशों के कारण मानसिक रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा।
कंगना ने कहा कि संसदीय परंपराएँ सीखने, समाधान खोजने और जनता की आवाज़ को शक्ति देने का माध्यम होती हैं, लेकिन विपक्ष ने बार-बार नारेबाज़ी व व्यवधान पैदा कर इन परंपराओं को ठेस पहुँचाई है। उनके अनुसार यह व्यवहार न सिर्फ सदन, बल्कि देश की लोकतांत्रिक गरिमा का भी अपमान है।
राहुल गांधी के भाषण पर सीधा प्रहार
कंगना रनौत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया भाषण की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि देश को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं, किन्तु उनके वक्तव्य में “न तथ्य थे, न दिशा — केवल भ्रम और विदेशी नैरेटिव।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा की अपेक्षा थी, परंतु भाषण ने जनता को भ्रमित करने का कार्य किया।
अंतरराष्ट्रीय महिला का चित्र दिखाए जाने पर तीखी आपत्ति
संसद में विपक्ष द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि वाली महिला का चित्र प्रस्तुत किए जाने पर कंगना ने गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संबंधित महिला स्वयं सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुकी है कि उसका भारत या हरियाणा चुनावों से कोई संबंध नहीं है। कंगना ने कहा—
“एक महिला सांसद होने के नाते मैं पूरे सदन की ओर से उस महिला से माफी मांगती हूँ।”
उन्होंने कांग्रेस पर महिलाओं के सम्मान के विषय में केवल उपदेश देने और व्यवहारिक स्तर पर उनका अपमान करने का आरोप लगाया।
महिला सशक्तिकरण पर प्रधानमंत्री की योजनाओं का उल्लेख
कंगना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तविक और प्रभावी महिला सशक्तिकरण के पक्षधर हैं। उन्होंने उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन में शौचालय निर्माण, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, छात्रवृत्ति योजनाएँ और आत्मनिर्भर महिला कार्यक्रमों को ऐसे प्रयास बताया जिन्होंने देशभर में करोड़ों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
उनके अनुसार—
“प्रधानमंत्री ईवीएम नहीं हैक करते, वह देशवासियों के दिलों को हैक करते हैं।”
ईवीएम विवाद पर कड़ा रुख
कंगना ने कहा कि कांग्रेस जिस बैलेट पेपर प्रणाली को श्रेष्ठ बताती है, उसी कालखंड में भारत के इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी धांधली — इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण मामला — हुई थी। उन्होंने कहा कि आज वही कांग्रेस ईवीएम पर अविश्वास फैलाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने बिहार में हाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ 60 लाख से अधिक फर्जी और मृत मतदाताओं को हटाया गया, 21 लाख नए वास्तविक मतदाता जुड़े और रिकॉर्ड 67% मतदान हुआ — जो लोकतंत्र की मजबूती और पारदर्शिता का प्रमाण है।
वन नेशन–वन इलेक्शन का समर्थन
कंगना रनौत ने बार-बार होने वाले चुनावों को देश की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर बड़ा बोझ बताते हुए कहा कि इससे 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा होता है। उनके अनुसार वन नेशन–वन इलेक्शन लागू होने से न केवल प्रशासन व सुरक्षा बलों पर दबाव कम होगा, बल्कि लोकतंत्र एक राष्ट्रीय उत्सव की तरह मनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा देशहित, पारदर्शिता और चुनावी सुधारों की राजनीति करती है, जबकि विपक्ष “भ्रम, अव्यवस्था और अविश्वास का वातावरण बनाकर लोकतंत्र को कमजोर” करता है।
