भरमौर, 22 जुलाई 2025। हिमाचल प्रदेश के भरमौर विधानसभा क्षेत्र के लामू स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आज ऐसा दृश्य देखने को मिला जो किसी भी लोकतंत्र और संवेदनशील शासन व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत है। मासूम स्कूली छात्राएं हाथों में प्लेकार्ड्स लेकर शिक्षकों की भारी कमी के विरोध में सड़कों पर उतर आईं। बच्चों द्वारा किए गए इस शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन ने सरकार की शिक्षा नीति और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
✍️ “हमें चाहिए शिक्षक, वादे नहीं!” – बच्चों की गूंजती आवाज
छात्राओं ने प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए:
“क्या यही है आत्मनिर्भर हिमाचल का मार्ग?”
“हमें चाहिए शिक्षक, वादे नहीं!”
“शिक्षकों की कमी, सरकार की नाकामी !”
यह नारे न केवल शिक्षकों की कमी की ओर इशारा करते हैं, बल्कि उस असंतोष को भी दर्शाते हैं जो भरमौर जैसे आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्र में वर्षों से पनप रहा है।

🎙️ विधायक डॉ. जनक राज ने जताई चिंता, कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना
भरमौर-पांगी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. जनक राज ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“यह दृश्य हिमाचल की कांग्रेस सरकार की शिक्षा के प्रति लापरवाही का जीवंत प्रमाण है। ये बच्चे सड़कों पर इसलिए हैं क्योंकि उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं है।”
डॉ. जनक राज ने कहा कि वह इस विषय को पहले भी बार-बार विधानसभा, मीडिया और प्रशासन के समक्ष उठा चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
“भाजपा की ओर से हम मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री तत्काल हस्तक्षेप करें और भरमौर सहित पूरे हिमाचल में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।”
📚 शिक्षकों की कमी बनी चिंता का विषय
भरमौर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा हमेशा से एक चुनौती रही है, लेकिन कोविड के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों को न भरना और बुनियादी ढांचे की अनदेखी से हालात और भी गंभीर हो गए हैं। स्कूली बच्चों की इस अनसुनी आवाज ने सरकार को अब स्पष्ट चेतावनी दे दी है।
“जनवरी में बर्फबारी, गर्मियों में पलायन और अब शिक्षकों की कमी — भरमौर के बच्चों को हर तरफ से बाधाएं झेलनी पड़ रही हैं। ये शिक्षा का नहीं, व्यवस्था का संकट है,” एक स्थानीय अभिभावक ने कहा।
🔁 यह कोई पहली घटना नहीं
प्रदेश के अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से भी लगातार शिक्षकों की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन यह पहली बार है जब बच्चों ने खुद अपने हक के लिए मोर्चा खोला है। यह दृश्य हर उस नीति निर्माता के लिए एक आईना है, जो केवल घोषणाओं तक सीमित रहते हैं।
📸 सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें
बच्चों के इस प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और लोगों का आक्रोश साफ नजर आ रहा है। आम जनता से लेकर शिक्षाविद तक सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
🟢 विधायक ने दी चेतावनी:
“अगर सरकार ने तुरंत शिक्षकों की भर्ती नहीं की, तो यह आंदोलन और व्यापक होगा। हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए — यही हमारा संकल्प है,” डॉ. जनक राज ने दोहराया।
