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भरमौर जातर मेला 2025: 84 मंदिर परिसर में 150 अस्थायी दुकानों के प्रस्ताव पर विवाद, व्यापार मंडल और पुजारियों ने जताई गहरी आपत्ति

भरमौर जातर मेला 2025: 84 मंदिर परिसर में 150 अस्थायी दुकानों के प्रस्ताव पर विवाद, व्यापार मंडल और पुजारियों ने जताई गहरी आपत्ति

भरमौर, जिला चंबाहिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल भरमौर में आयोजित होने वाले भरमौर जातर मेला 2025 को लेकर स्थानीय संगठनों और पुजारी वर्ग में गहरी नाराज़गी देखी जा रही है। 84 मंदिर परिसर में अस्थायी दुकानों की अत्यधिक स्थापना के विरुद्ध व्यापार मंडल भरमौर, मणिमहेश युवक मंडल, और 84 मंदिरों के पुजारीगण ने मिलकर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम), भरमौर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपते हुए 2024 में दी गई शिकायत के आलोक में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि गत वर्ष 2024 में भी यही विषय प्रशासन के समक्ष रखा गया था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस वर्ष एक बार फिर 150 दुकानों के आबंटन हेतु टेंडर आमंत्रित किए गए हैं, जिससे 84 मंदिर परिसर की धार्मिक गरिमा, पारंपरिक स्वरूप और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं।

धार्मिक स्थल पर बढ़ते व्यवसायीकरण से उपजा असंतोष

ज्ञापन में मंदिर परिसर की पवित्रता और उसके पारंपरिक स्वरूप को संरक्षित रखने की पुरज़ोर मांग की गई है। व्यापार मंडल के प्रधान श्री रणजीत शर्मा ने कहा, “84 मंदिरों का परिसर केवल एक मेला स्थल नहीं, बल्कि गद्दी समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक आत्मा है। यहां व्यवसायिक ढांचा थोपना परंपरा के विरुद्ध है।”

पुजारियों की ओर से बताया गया कि टेन्डर में दुकानों की अवधि स्पष्ट नहीं की गई, और 9×9 फीट की दुकानों के लिए परिसर में पर्याप्त स्थान नहीं है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि दुकानदार अक्सर निर्धारित स्थान से अधिक क्षेत्र घेर लेते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही बाधित होती है।

मुख्य आपत्तियाँ एवं जोखिम:

  1. आग लगने का खतरा – अस्थायी दुकानों में सिलेंडर, चूल्हे और असुरक्षित इलेक्ट्रिक वायरिंग से अग्निकांड की आशंका बढ़ती है।
  2. भगदड़ की संभावना – संकरे मार्गों और अत्यधिक भीड़ के चलते जानलेवा भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  3. श्रद्धालुओं को दर्शन में बाधा – अस्थायी ढांचों से मंदिरों की दृश्यता और पहुंच बाधित होती है।
  4. गद्दी संस्कृति को क्षति – अतिक्रमण के कारण पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
  5. स्थानीय सुरक्षा संकट – स्कूलों और रिहायशी क्षेत्रों के समीप दुकानें लगने से नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है।

मणिमहेश युवक मंडल के अध्यक्ष श्री करण कुमार शर्मा ने कहा, “सरकार एक ओर आपदा प्रबंधन के नाम पर मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत स्तर पर ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जो संभावित आपदा को न्यौता देते हैं।”

दिए गए सुझाव:

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मेला आयोजकों को पारदर्शिता और सुरक्षा के मूल सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। “यह मेला एक पवित्र सांस्कृतिक आयोजन है, न कि एक अस्थायी बाज़ार। प्रशासन को पारंपरिक स्वरूप की रक्षा करनी चाहिए,” पुजारी संघ ने कहा।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार

ज्ञापन की प्रतिलिपि भरमौर विधायक और चंबा के उपायुक्त को भी भेजी गई है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस बार स्थानीय संगठनों और श्रद्धालुओं की चिंताओं को कितनी गंभीरता से लेता है।

उल्लेखनीय है कि भरमौर जातर मेला हर वर्ष श्रावण महीने में आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु देशभर से आते हैं। यह आयोजन मणिमहेश यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और स्थानीय गद्दी समुदाय की परंपराओं और धार्मिक विश्वासों की सजीव अभिव्यक्ति है।

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