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भरमौर जातर मेले में लगने वाली दुकानों पर रोक की मांग

भरमौर जातर मेले में लगने वाली दुकानों पर रोक की मांग

भरमौर, हिमाचल प्रदेश – आगामी भरमौर जातर मेले के दौरान 84 मंदिर परिसर में अस्थायी दुकानों की स्थापना को रोकने हेतु स्थानीय व्यापार मंडल, युवक मंडल और मंदिर पुजारीगण ने उपायुक्त को एक महत्वपूर्ण अनुरोध पत्र सौंपा है।

पत्र में कहा गया है कि इस बार मेले के दौरान 150 अस्थायी दुकानों की स्थापना की योजना बनाई जा रही है, जो मंदिर परिसर के लिए विभिन्न खतरों को जन्म दे सकती है। स्थानीय समुदाय ने आग, भगदड़ और तीर्थयात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए इस योजना को निरस्त करने का अनुरोध किया है।

यह भी उल्लेख किया गया है कि 5-10 प्रदर्शनी या संबंधित दुकानों को पंचायत घर के पास स्थापित करने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन मंदिर परिसर में इतनी बड़ी संख्या में दुकानों की स्थापना से नुकसान की आशंका है। भरमौर जातर मेला भरमौर की संस्कृति का अभिन्न अंग है, लेकिन इतनी दुकाने लगाना और मंदिरों व लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना भरमौर की संस्कृति नहीं है।

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अग्नि सुरक्षा का खतरा

भरमौर के 84 मंदिर परिसर की स्थापना लगभग 1400 साल पुरानी है और यह एएसआई द्वारा संरक्षित है। पत्र में यह चिंता जताई गई है कि इतनी बड़ी संख्या में दुकानों की स्थापना से आग लगने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। दुकानों में उचित वायरिंग और लाइटिंग सुरक्षा उपायों की कमी होती है और दुकानदारों द्वारा रात में खाना पकाने की प्रथा से जोखिम और बढ़ जाता है। एक छोटी सी गलती इन प्राचीन धरोहरों को नष्ट कर सकती है।

भगदड़ का खतरा

भीड़भाड़ और संकरी जगहों के कारण भगदड़ का खतरा भी बढ़ जाता है। मेले के दौरान मंदिर परिसर में लोगों की उच्च घनत्वता के कारण आगंतुकों और भक्तों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। यह भीड़भाड़ गंभीर हताहतों और मंदिर संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।

भक्तों को असुविधा

भरमौर जातर मेले का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव की भक्ति और पूजा को बढ़ावा देना है। हालाँकि, दुकानों की स्थापना से मंदिरों का दृश्य और पहुँच बाधित होती है, जिससे तीर्थयात्रियों को एक संपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव नहीं मिल पाता है। यह घटना के धार्मिक महत्व को कम करता है।

सुरक्षा संबंधी चिंताएं

अस्थायी दुकानों द्वारा खींची गई बड़ी भीड़ विभिन्न सुरक्षा जोखिम पैदा करती है, जिसमें आग का खतरा और भगदड़ की संभावना शामिल है। स्थानीय निवासी और भक्त इस अवधि के दौरान संभावित खतरों के बारे में स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं।

गद्दी जनजाति के सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर असर

भरमौर जातर मेला गद्दी जनजाति की परंपरा का अभिन्न अंग है, जहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और अनुष्ठान किए जाते हैं। इतनी अधिक संख्या में दुकानों की स्थापना इन पारंपरिक गतिविधियों को बाधित करती है और इन कार्यक्रमों के लिए निर्धारित स्थान को घेर लेती है, जिससे मेले की सांस्कृतिक महत्ता कम हो जाती है।

अनुरोध पत्र के मुख्य बिंदु

स्थानीय समुदाय ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि 84 मंदिर परिसर में इन अस्थायी दुकानों की स्थापना को तुरंत रोका जाए। इस प्राचीन स्थल की पवित्रता, सुरक्षा, और सांस्कृतिक धरोहर को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है।

पत्र की प्रतिलिपि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, उपमंडलीय मजिस्ट्रेट और विधायक को भी भेजी गई है, ताकि इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

भरमौर जातर मेला एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें अस्थायी दुकानों की अत्यधिक संख्या से उत्पन्न खतरों को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय समुदाय का यह अनुरोध न केवल व्यावहारिक है, बल्कि इसकी अवहेलना गंभीर परिणाम ला सकती है। प्रशासन को इस मुद्दे पर जल्द और सही कदम उठाने की आवश्यकता है।

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