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भरमौर में प्रीफैब्रिकेटेड अस्पताल की धीमी निर्माण गति से लोग परेशान

भरमौर क्षेत्र के निवासियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है, जिसका कारण है यहां प्रस्तावित प्रीफैब्रिकेटेड अस्पताल का निर्माण कार्य जो 5 वर्षों से भी अधिक समय से चल रहा है। भरमौर, जो कि अपने 84 मंदिरों और मणिमहेश यात्रा के लिए प्रसिद्ध है, उस क्षेत्र के लोगों को अब हर छोटी-बड़ी बीमारी के लिए चंबा जाना पड़ता है, जहां के लिए सड़कों की स्थिति भी खराब है।

अस्पताल के निर्माण में देरी को लेकर स्थानीय निवासियों में बहुत अधिक निराशा और गुस्सा है। अस्पताल का 2020 में जयराम ठाकुर द्वारा शिलान्यास किया गया था, लेकिन इतने साल बाद भी यह अधूरा पड़ा है। वर्ष 2023 से यह सुनने में आ रहा है कि अस्पताल का कार्य कुछ समय मे पूरा हो जाएगा लेकिन वो सब अभी तक झूठ ही साबित हुआ है।

स्थानीय निवासीयों ने बताया, “हमारे यहां चिकित्सा सुविधाओं की घोर कमी है। अगर किसी को गंभीर उपचार की जरूरत होती है, तो हमें चंबा या दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। भरमौर से चंबा राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति दयनीय है जिस से मरीजों को और भी ज्यादा तकलीफ झेलनी पड़ती है। चंबा के लिए सफर करना न केवल मरीजों के लिए बल्कि उनके साथ यात्रा कर रहे परिवार के लोगों के लिए भी कठिन होता है। गंभीर मामलों में मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सकता, जिससे उनका जीवन भी खतरे में पड़ जाता है।”

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पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग की दस वर्षों के बाद स्थिति दयनीय, धीमी निर्माण गति से कहीं लग न जाएं 50 वर्ष – रोजाना 24 (rozana24.com)

इस समस्या का समाधान करने के लिए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है। यह समस्या सिर्फ निर्माण में देरी की नहीं है, बल्कि यह भरमौर क्षेत्र के लोगों के जीवन पर भी प्रभाव डालती है।

प्रीफैब्रिकेटेड इमारत का निर्माण का एक मुख्य कारण यह भी होता है कि इमारत का निर्माण जल्द हो सके लेकिन भरमौर के प्रीफैब्रिकेटेड अस्पताल के निर्माण अत्यधिक देरी हो रही है।

इस मुद्दे पर आगे विचार विमर्श और कार्रवाई की गहराई से आवश्यकता है, ताकि भरमौर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा सकें और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो।

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