नशा निवारण समितियां मंडी जिला में नशे के खिलाफ एक सशक्त हथियार बनकर उभरी हैं। मंडी, 24 दिसंबर—जिला मंडी की सभी 555 ग्राम पंचायतों में नशा निवारण समितियों की बैठकें आयोजित कर एंटी चिट्टा अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती दी गई है। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत ग्राम स्तर पर समन्वय बढ़ाने और नशामुक्ति का सामूहिक संकल्प लिया गया है।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि नशा एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिसका प्रभाव विशेषकर युवाओं पर पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तीन चरणों में बैठकों का आयोजन किया। पहले चरण में 15 दिसंबर को जिला की 24 अति संवेदनशील ग्राम पंचायतों में बैठकें स्थानीय पाठशालाओं के सहयोग से करवाई गईं। इन पंचायतों में संबंधित स्कूलों के शिक्षकों की अध्यक्षता में नशा निवारण समितियों का गठन किया गया, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों तक सीधा संदेश पहुंच सके।
दूसरे और तीसरे चरण में 22 दिसंबर और 24 दिसंबर को शेष सभी ग्राम पंचायतों में बैठकों का आयोजन किया गया। इन पंचायतों में पंचायत प्रधान की अध्यक्षता में नशा निवारण समितियां गठित की गईं। पंचायत सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया, जबकि सभी वार्ड सदस्य, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, महिला मंडल, युवक मंडल और स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों को समिति का सदस्य बनाया गया। प्रशासन का उद्देश्य है कि समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जाए।
बैठकों के दौरान पंचायत क्षेत्र में नशा विरोधी अभियान चलाने, मादक पदार्थों के दुरुपयोग की स्थानीय स्थिति का आकलन करने और चिट्टा जैसे घातक नशों पर सतत निगरानी रखने पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने बताया कि समितियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे तस्करों, नशा करने वालों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें तथा गोपनीय सूचनाएं समय-समय पर स्थानीय पुलिस थानों या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करें।
इसके अतिरिक्त विद्यालयों, समुदायों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठकों में वक्ताओं ने कहा कि नशे की समस्या केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। यदि पंचायत, शिक्षक, अभिभावक, महिला मंडल और युवा एकजुट होकर कार्य करें, तो नशे जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने सभी जिलावासियों से आह्वान किया कि वे एंटी चिट्टा अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाएं और किसी भी प्रकार की नशे से जुड़ी जानकारी प्रशासन के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि नशामुक्त मंडी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनसहयोग सबसे बड़ा आधार है।
