मनाली के सुमित ठाकुर को दो-दो राष्ट्रीय पुरस्कार, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

जनसेवा ही सर्वोपरि: मनाली के सुमित ठाकुर को दो-दो राष्ट्रीय पुरस्कार, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

स्कूली दिनों से ही जनसेवा का भाव रखने वाले सुमित ठाकुर आज देशभर के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

भारत सरकार के युवा सेवा एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय युवा पुरस्कार में सुमित ठाकुर का चयन देशभर के 7 करोड़ युवाओं में से मात्र 11 युवाओं में हुआ। यह पुरस्कार उन्हें वर्ष 2021 और 2022 के लिए उनके रक्तदान, अंगदान, कोविड सेवा कार्य, जन-जागरूकता अभियान और सरकारी योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने जैसे सराहनीय योगदान के लिए दिया गया है।

दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय युवा सेवा एवं खेल मंत्री मनसुख मांडवीय, राज्य मंत्री रक्षा खडसे, और मंत्रालय की सचिव मीता राजीव लोचन ने सुमित ठाकुर को यह सम्मान प्रदान किया।

समाजसेवा में युवाओं को जोड़ने की अनूठी पहल

सुमित ठाकुर न सिर्फ खुद समाजसेवा में लगे हुए हैं, बल्कि वह हिमाचल के युवाओं को भी समाजसेवा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। वे युवा: एनजीओ के सह-संस्थापक, पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में सीआईओ हैं, जो प्रदेश के हर जिले में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

युवा: संस्था के माध्यम से सुमित ने हजारों युवाओं को रक्तदान, पर्यावरण सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे कार्यों से जोड़ा है।

राष्ट्रपति पुरस्कार भी पा चुके हैं सुमित ठाकुर

सुमित ठाकुर को इससे पहले भी राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। यह दर्शाता है कि वह निरंतर समाज सेवा में अग्रसर हैं और लंबे समय से समर्पण भाव से जनहित के कार्य कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर बधाइयों की भरमार

सम्मानित होते ही स्थानीय क्षेत्र और सोशल मीडिया पर सुमित ठाकुर को बधाई देने वालों का तांता लग गया है। युवाओं में उनकी लोकप्रियता और सादगी उन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व बनाती है। कई युवा अब उन्हें “युवा आइकन ऑफ हिमाचल” के रूप में देख रहे हैं।

व्यवसायिक नगरी मनाली से समाज सेवा की राह

जहां मनाली जैसे पर्यटन और व्यवसायिक गतिविधियों वाले क्षेत्र में अधिकांश युवा पैसे कमाने की होड़ में लगे रहते हैं, वहीं सुमित ठाकुर जैसे युवा जनसेवा का रास्ता चुनकर समाज में मिसाल कायम कर रहे हैं।

सुमित ने दी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को

सम्मान मिलने के बाद सुमित ठाकुर ने कहा, “यह पुरस्कार मेरा नहीं, मेरे माता-पिता, गुरुजनों और साथियों की प्रेरणा और सहयोग का परिणाम है। उन्होंने हर कठिन परिस्थिति में मेरा साथ दिया, जिसके कारण आज यह मुकाम मिला है।”

आज हिमाचल के कोने-कोने से युवा सुमित ठाकुर से प्रेरणा लेकर समाजसेवा की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उनकी यह यात्रा बताती है कि जनसेवा केवल भावना नहीं, बल्कि जीवन की सर्वोच्च साधना है।