रोजाना24, चम्बा 07 अगस्त : मणिमहेश यात्रा से पूरे उत्तरी भारत में लोगों की आमदनी में बढ़ौतरी होती है। यात्रा के दौरान गुजरात, पंजाब व हरियाणा राज्य में निर्मित कपड़े व कम्बल,जूते, चप्पल से लेकर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के पेय पदार्थ, चिप्स आदि के अलावा हिमाचल प्रदेश के सेब, अखरोट, राजमाह,माश,आदि की मांग पूरी नहीं हो पाती। 

यात्रियों के हर पड़ाव पर उनकी आवश्यकता की वस्तु उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से पठानकोट व कांगड़ा जिला से मणिमहेश तक के मार्ग में हजारों अस्थाई दुकानें स्थापित की जाती हैं। यात्रियों की आवश्यकता पूरी करने के साथ साथ यह स्थानीय लोग अपनी आजीविका भी चला लेते हैं। 

लेकिन इस प्रक्रिया में कई बार यातायात, जलप्रदूषण, व कानून व्यवस्था सम्भालने की समस्य़ा खड़ी हो जाती है।

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इसी कड़ी में भरमौर प्रशासन गत दिवस भरमाणी मंदिर परिसर में लगी अस्थाई दुकानों को परिसर से बाहर स्थापित करने के निर्देश दिए। नायब तहसीलदार आशीष ठाकुर के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने भरमाणी माता मंदिर परिसर में अस्थाई दुकानें लगाने वालों को निर्देश दिए कि इन अस्थाई दुकानों के कारण पास स्थित स्रोत का पेयजल दूषित हो रहा है। प्रदूषित पेयजल की समस्या मुख्यालय में नई नहीं है। फिर भी प्रशासन इसे कम करने का प्रयास करता दिख रहा है। वहीं अस्थाई दुकानों के कारण भरमाणी मंदिर परिसर का सौंदर्य भी प्रभावित हो रहा है। परिसर में दुकानें लगने से परिसर में यात्रियों के लिए बहुत कम स्थान बचता है।

नायब तहसीलदार ने कहा कि सभी दुकाने परिसर से बाहर स्थापित की जाएं ताकि यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ स्थानीय लोगों का व्यवसाय भी चलता रहे। उन्होंने कहा कि कोई भी दुकानदार सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं की बिक्री न करे व अपने आस पास सफाई व्यवस्था बनाए रखें।