हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध धौलाधार पर्वत श्रृंखला (Dhauladhar Mountain Range) में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों और एडवेंचर प्रेमियों के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। हाल के महीनों में ट्रेकर्स के लापता होने, खराब मौसम में फंसने और दुर्घटनाओं की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने धौलाधार के 10 प्रमुख ट्रेकिंग रूट पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 15 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।

इस फैसले का उद्देश्य ट्रेकिंग गतिविधियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि ट्रेकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना, आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य को तेज़ और प्रभावी बनाना तथा मानसून के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना है। जिला प्रशासन का मानना है कि कई ट्रेकर्स बिना किसी सूचना के कठिन पर्वतीय मार्गों पर निकल जाते हैं, जिससे उनके लापता होने या दुर्घटना की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

हिमाचल में धौलाधार ट्रेकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

धौलाधार ट्रेकिंग रजिस्ट्रेशन क्यों किया गया अनिवार्य?

कांगड़ा के उपायुक्त (DC) हेमराज बैरवा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मानसून के दौरान धौलाधार क्षेत्र में प्राकृतिक खतरे कई गुना बढ़ जाते हैं। घना कोहरा, लगातार बारिश, भूस्खलन, अचानक आने वाली बाढ़, फिसलन भरे रास्ते और बेहद कम दृश्यता जैसी परिस्थितियां ट्रेकिंग को जोखिमपूर्ण बना देती हैं।

प्रशासन के अनुसार कई मामलों में ट्रेकर्स अपने ट्रेकिंग रूट, यात्रा की अवधि या वापसी की जानकारी किसी को नहीं देते। ऐसे में यदि वे रास्ता भटक जाते हैं या किसी हादसे का शिकार हो जाते हैं तो खोज एवं बचाव अभियान में कई दिन लग जाते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है बल्कि रेस्क्यू टीम की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।

इसी समस्या के समाधान के लिए अब प्रत्येक ट्रेकर का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।


धौलाधार के किन-किन ट्रेकिंग रूट पर लागू होगा नया नियम?

जिला प्रशासन ने जिन 10 ट्रेकिंग रूट को इस आदेश के दायरे में शामिल किया है, वे हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय, चुनौतीपूर्ण और ऊंचाई वाले पर्वतीय मार्गों में शामिल हैं।

1. बलेनी दर्रा (Baleni Pass)

बलेनी दर्रा धौलाधार क्षेत्र का अपेक्षाकृत कम चर्चित लेकिन कठिन ट्रेकिंग रूट माना जाता है। यहां मौसम बेहद तेजी से बदलता है और मानसून के दौरान फिसलन तथा कोहरे के कारण ट्रेकिंग काफी जोखिमपूर्ण हो जाती है।

2. मिंकियानी दर्रा (Minkiani Pass)

मिंकियानी दर्रा मैकलोडगंज और चंबा क्षेत्र को जोड़ने वाले प्रमुख ट्रेकिंग मार्गों में से एक है। यह ट्रेक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन बारिश के मौसम में यहां भूस्खलन और रास्ता भटकने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।

3. भीमघसुत्री (Bhimghasutri)

भीमघसुत्री का ट्रेक ऊंचाई और कठिन चढ़ाई के कारण अनुभवी ट्रेकर्स के बीच लोकप्रिय माना जाता है। इस मार्ग पर मौसम अचानक बदलने और कम दृश्यता की समस्या अक्सर देखने को मिलती है।

4. इंद्रहार दर्रा (Indrahar Pass)

इंद्रहार दर्रा हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट में शामिल है। हर साल देश-विदेश से हजारों ट्रेकर्स यहां पहुंचते हैं। हालांकि मानसून के दौरान तेज बारिश, कोहरा और फिसलन के कारण यह ट्रेक काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

5. कुंडली दर्रा (Kundli Pass)

कुंडली दर्रा ऊंचाई वाले दुर्गम मार्गों में गिना जाता है। यहां मौसम का पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है और कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क भी उपलब्ध नहीं रहता।

6. तोरल दर्रा (Toral Pass)

तोरल दर्रा प्राकृतिक सौंदर्य और ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। हालांकि खराब मौसम के दौरान यहां ट्रेकिंग करना जोखिम भरा माना जाता है।

7. तालंग दर्रा (Talang Pass)

तालंग दर्रा का मार्ग संकरा और कई स्थानों पर फिसलन भरा होता है। लगातार बारिश होने पर इस रूट पर ट्रेकिंग करना प्रशासन द्वारा भी जोखिमपूर्ण माना जाता है।

8. सिंघार दर्रा (Singhar Pass)

सिंघार दर्रा अपेक्षाकृत कम भीड़ वाला ट्रेकिंग रूट है। यहां कई हिस्सों में घना जंगल और ऊंची ढलान होने के कारण ट्रेकर्स के रास्ता भटकने की संभावना बढ़ जाती है।

9. वारू दर्रा (Waru Pass)

वारू दर्रा ऊंचाई वाले कठिन ट्रेक में शामिल है। यहां मौसम कुछ ही मिनटों में साफ से घने कोहरे में बदल सकता है, जिससे ट्रेकिंग के दौरान अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है।

10. जलसू दर्रा (Jalsu Pass)

जलसू दर्रा धौलाधार क्षेत्र का ऐतिहासिक और लोकप्रिय ट्रेकिंग मार्ग माना जाता है। मानसून के दौरान यहां छोटे-छोटे नाले अचानक उफान पर आ जाते हैं, जिससे ट्रेकिंग और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।


ट्रेकिंग से पहले कहां और कैसे होगा रजिस्ट्रेशन?

जिला प्रशासन ने सभी ट्रेकिंग रूट के शुरुआती स्थानों पर आपदा प्रबंधन चेक-पोस्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है।

इन चेक-पोस्ट का संचालन प्रतिदिन:

  • सुबह 5:00 बजे
  • शाम 5:00 बजे तक

किया जाएगा।

प्रत्येक ट्रेकर या ट्रेकिंग समूह को ट्रेक शुरू करने से पहले व्यक्तिगत रूप से चेक-पोस्ट पर उपस्थित होकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा।


रजिस्ट्रेशन के दौरान कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

प्रशासन के अनुसार ट्रेकर्स को निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध करानी होगी—

  • पूरा नाम
  • मोबाइल नंबर
  • पहचान पत्र का विवरण
  • ट्रेकिंग रूट का नाम
  • यात्रा की संभावित अवधि
  • समूह के सदस्यों की संख्या
  • अनुमानित वापसी का समय
  • आपातकालीन संपर्क व्यक्ति का मोबाइल नंबर

इस जानकारी की सहायता से किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन तुरंत खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर सकेगा।


बिना रजिस्ट्रेशन ट्रेकिंग करने पर क्या होगा?

यदि कोई व्यक्ति या समूह बिना रजिस्ट्रेशन ट्रेकिंग करता है, या निर्धारित मार्ग से बिना पूर्व सूचना के हट जाता है और किसी दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा का शिकार हो जाता है, तो आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन निजी रेस्क्यू एजेंसियों की सेवाएं ले सकता है।

ऐसी स्थिति में पूरे बचाव अभियान का खर्च संबंधित ट्रेकर या समूह से वसूला जाएगा। इससे ट्रेकर्स को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा और अनावश्यक जोखिम उठाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।


नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर जुर्माना, अभियोजन और अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।


मानसून में धौलाधार ट्रेकिंग क्यों होती है सबसे ज्यादा खतरनाक?

विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच धौलाधार क्षेत्र में ट्रेकिंग के दौरान कई प्राकृतिक खतरे बढ़ जाते हैं, जिनमें—

  • भूस्खलन
  • अचानक बाढ़
  • चट्टानों का गिरना
  • घना कोहरा
  • बेहद कम दृश्यता
  • फिसलन भरे ट्रेल
  • तेज बारिश
  • नदी-नालों का जलस्तर बढ़ना
  • मौसम का अचानक बदल जाना

इसी कारण प्रशासन ट्रेकिंग से पहले मौसम की जानकारी लेने, अधिकृत मार्गदर्शकों के साथ यात्रा करने और सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह देता है।