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चंबा में BPL सूची से नाम हटाने पर बवाल, गरीबों के हक से खिलवाड़ का आरोप, डीसी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन

चंबा में BPL सूची से नाम हटाने पर बवाल, गरीबों के हक से खिलवाड़ का आरोप, डीसी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन

चंबा जिले में बीपीएल सूची (BPL List Chamba) से गरीब परिवारों को बाहर किए जाने के विरोध में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में लोग एकजुट होकर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जय सिंह की अगुवाई में उपायुक्त कार्यालय चंबा के बाहर धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस फैसले को गरीब विरोधी करार दिया।

प्रदर्शन के बाद उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक ज्ञापन भी भेजा गया, जिसमें बीपीएल सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने की मांग की गई। यह धरना गांधी स्मारक परिसर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बीपीएल चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

बीपीएल में चयन और निष्कासन की प्रक्रिया को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जय सिंह ने गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सुनियोजित तरीके से गरीब परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर करने का गलत निर्णय लिया है। जय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लाखों बीपीएल परिवारों का गला घोंटने का काम किया जा रहा है और गरीबों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है।

जय सिंह ने कहा, “यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि गरीबों को योजनाओं से बाहर करने की साजिश है। बीपीएल सूची से नाम हटाकर गरीबों का हक छीना जा रहा है।” उन्होंने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे राजनीतिक मंशा काम कर रही है।

पांच सदस्यीय कमेटी पर पक्षपात के आरोप

प्रदर्शन के दौरान जय सिंह ने बीपीएल चयन के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह कमेटी पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रही है और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जा रहा है। गरीब परिवारों की वास्तविक स्थिति को बिना सही जांच के बीपीएल सूची से बाहर किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पंचायतों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को पूरी तरह से दरकिनार किया गया है। वार्ड पंच, प्रधान, उप-प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद सदस्यों में से किसी को भी विश्वास में नहीं लिया गया, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

आदेश वापस नहीं हुए तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

जय सिंह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बीपीएल सूची से नाम हटाने से जुड़े आदेशों को वापस नहीं लिया, तो प्रदेश सरकार को भारी जनआक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गरीब वर्ग पहले ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है और अब बीपीएल से बाहर कर उन्हें दोहरी मार दी जा रही है।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि बीपीएल सूची से बाहर होने के कारण गरीब परिवार राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित हो जाएंगे, जो उनके जीवन पर सीधा असर डालेगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि बीपीएल चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका सुनिश्चित की जाए।