हिमाचल प्रदेश, विशेषकर कांगड़ा और चंबा के लोक संस्कृति प्रेमियों के लिए एक खास खबर है। सुनील राणा, जिन्होंने अपने जीवन के 25 वर्ष हिमाचली लोक संस्कृति को समृद्ध करने और उसे देश-विदेश में पहचान दिलाने में लगा दिए, अब कांग्रेस पार्टी से कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। उनकी यह मांग न केवल उनके समर्थकों के बीच बल्कि व्यापक राजनीतिक और सामाजिक समुदायों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

लोक संस्कृति का योगदान और राजनीतिक प्रवेश

सुनील राणा ने हिमाचल की गद्दी लोक संस्कृति को एक नई पहचान दी है। उन्होंने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हिमाचली संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया है। उनका मानना है कि राजनीति में आने से वे इस संस्कृति के प्रचार-प्रसार और संरक्षण में और भी बेहतर काम कर सकेंगे।

वोट बैंक और समर्थन

सुनील राणा की उम्मीदवारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्यों है? उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी से कांग्रेस को निम्नलिखित वोट बैंक मिल सकता है:

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  1. पारंपरिक वोट: कांग्रेस के परंपरागत समर्थक।
  2. समुदाय के प्रशंसकों के वोट: विभिन्न समुदायों में उनके प्रशंसक।
  3. गद्दी समुदाय के वोट: गद्दी समुदाय से विशेष समर्थन।
  4. युवा शक्ति: युवा मतदाताओं में लोकप्रियता।
  5. नाराज बीजेपी समर्थकों के वोट: जो वर्तमान में बीजेपी से असंतुष्ट हैं।

सुनील राणा राजनीति में एक नई और निर्विवाद छवि के रूप में उभर रहे हैं, जिससे उन्हें व्यापक समर्थन मिलने की संभावना है।

सुनील राणा के YouTube पर 1, 37,000 सब्स्क्राइबर हैं और उनकी मशहूर गद्दी नाटी नॉन स्टॉप को एक करोड़ से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

सुनील राणा का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य हिमाचली लोक संस्कृति को और अधिक समृद्ध बनाना और उसे वैश्विक मंच पर ले जाना है। राजनीति में उनका प्रवेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

यह देखना बाकी है कि कांग्रेस पार्टी हाईकमान उनकी मांग पर कैसी प्रतिक्रिया देती है। सुनील राणा के समर्थकों में आशा की किरण है कि उन्हें यह मौका दिया जाएगा।