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📰 भरमौर के मलकौता गांव से भेड़पालकों की समस्याएं पहुंचीं वूल फेडरेशन अध्यक्ष तक – शिवचरण ठाकुर ने सौंपा ज्ञापन

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला स्थित भरमौर उपमंडल के मलकौता गांव से एक अहम सामाजिक पहल सामने आई है। गांव के वरिष्ठ भेड़पालक शिवचरण ठाकुर ने भेड़पालकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को लेकर वूल फेडरेशन, हिमाचल प्रदेश के माननीय अध्यक्ष कुमार जी को एक लिखित ज्ञापन सौंपा, जिसमें क्षेत्रीय पशुपालकों की कई गंभीर मांगों को रेखांकित किया गया है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मलकौता सहित भरमौर क्षेत्र में भेड़पालन आज भी सैकड़ों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है, किंतु लगातार उपेक्षा, असुविधाएं और अव्यवस्थित नीतियों के कारण यह परंपरागत व्यवसाय संकट में आ गया है।

शिवचरण ठाकुर द्वारा रखी गई मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

🔹 भेड़ों को स्नान कराने की स्थायी व्यवस्था नहीं:
गर्मियों में भेड़ों को साफ रखना अत्यंत आवश्यक होता है, लेकिन क्षेत्र में ऐसा कोई सुरक्षित स्नान स्थल उपलब्ध नहीं है।

🔹 भेड़-बकरी चोरी की बढ़ती घटनाएं:
पिछले कुछ वर्षों में चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे भेड़पालकों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

🔹 बाहरी बकरवालों की अनियंत्रित आवाजाही पर रोक:
जम्मू-कश्मीर आदि से आने वाले बकरवाल सीमित चारागाहों पर दबाव डालते हैं, जिससे स्थानीय भेड़पालकों को नुकसान होता है।

🔹 ऊन का उचित मूल्य और MSP की मांग:
भेड़पालकों को ऊन का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। शिवचरण ठाकुर ने ऊन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करने की मांग रखी।

🔹 प्राकृतिक आपदा में नुकसान की भरपाई:
बर्फबारी, बारिश आदि आपदाओं में भेड़ों की मृत्यु पर मुआवजा या बीमा योजना की व्यवस्था की मांग की गई।

🔹 स्वास्थ्य और ऊन कटाई शिविरों की आवश्यकता:
हर वर्ष कम से कम 4-5 शिविरों के आयोजन की आवश्यकता जताई गई, जिनमें टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और ऊन कटाई की सुविधाएं मिलें।

🔹 ग्रीष्मकालीन अवधि में वूल फेडरेशन कार्यालय को भरमौर स्थानांतरित किया जाए:
ताकि इस दौरान स्थानीय भेड़पालकों को त्वरित सहायता और मार्गदर्शन मिल सके।

शिवचरण ठाकुर ने बताया कि ये समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि, “हमारे क्षेत्र के भेड़पालक आत्मनिर्भर हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में अब हतोत्साहित हो रहे हैं। यह आवश्यक है कि सरकार और विभाग समय रहते जागरूक हों।”

स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों ने शिवचरण ठाकुर की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि वूल फेडरेशन तथा राज्य सरकार इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक कदम उठाएंगे।