हिमाचल में बदले जाएंगे करुणामूलक नौकरी के नियम, पात्रों को मिलेगी नौकरी

हिमाचल में बदले जाएंगे करुणामूलक नौकरी के नियम, पात्रों को मिलेगी नौकरी

शिमला। हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक आधार पर नौकरियों के नियमों में बदलाव होने जा रहा है। इस संबंध में गठित कैबिनेट सब-कमेटी आगामी 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। बुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान यह मुद्दा उठा, जहां भाजपा विधायकों ने पात्रों को नौकरी न मिलने को लेकर सरकार को घेरा। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भरोसा दिलाया कि पात्र आवेदकों को जल्द नौकरी दी जाएगी।

कैबिनेट कमेटी 15 अप्रैल से पहले देगी रिपोर्ट

विधानसभा में चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार करुणामूलक आधार पर पात्र सभी लोगों को समयबद्ध तरीके से नौकरी देगीकैबिनेट सब-कमेटी के अध्यक्ष रोहित ठाकुर ने सदन को आश्वस्त किया कि 15 अप्रैल से पहले रिपोर्ट तैयार होगी

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार पूर्व भाजपा सरकार द्वारा बनाई गई नीति को ही लागू रखेगी, जिसमें विभागों को पांच प्रतिशत रिक्तियों पर करुणामूलक आधार पर भर्ती करने का अधिकार दिया गया था। हालांकि, वर्तमान में विभिन्न विभागों में कुल 1,839 लंबित मामले हैं, जिनका समाधान किया जाएगा।

पेंशन और आय सीमा बनी बड़ी बाधा

सरकार करुणामूलक नौकरी देने के लिए पेंशन और आय सीमा को भी ध्यान में रख रही है। पेंशन का एक हिस्सा आय में जोड़ा जाता है, जिससे पात्रता प्रभावित होती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अभी तक 2,524 मामले अस्वीकृत किए जा चुके हैं

भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती, सुरेंद्र शौरी और रणधीर शर्मा ने इस मुद्दे पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि आय सीमा करुणामूलक नौकरी में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इसमें कुछ छूट दी जाए, तो कई जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सकती है।

भाजपा सरकार के समय भी लंबित थे मामले

जय राम ठाकुर ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया था और रिटायरमेंट से एक दिन पहले मृत्यु होने की स्थिति में अगले ही दिन परिवार को नौकरी देने का प्रावधान किया था

भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने सरकार से पूछा कि क्या ऐसी नीति बनाई जाएगी, जिससे पात्र लोगों को जल्द नौकरी मिल सके। विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि जितने मामले स्वीकृत हुए हैं, उससे अधिक अस्वीकृत किए जा चुके हैं

राजनीतिक बयानबाजी नहीं होगी, सिर्फ करुणामूलक मामलों पर चर्चा

इस विषय पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि केवल करुणामूलक नौकरी से जुड़े मामलों पर ही बात होगी, अन्य किसी भी राजनीतिक बयानबाजी को रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाएगा।