धर्मशाला शहर में आयोजित कांगड़ा कार्निवाल में नशे के खिलाफ अभियान लगातार रफ्तार पकड़ता जा रहा है। कांगड़ा के उपायुक्त हेम राज बैरवा ने जानकारी देते हुए बताया कि चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने आम लोगों, विशेषकर युवाओं को जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान छेड़ा है। इसी कड़ी में शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रतिदिन जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग ले रहे हैं।
उपायुक्त हेम राज बैरवा ने बताया कि फव्वारा चौक, गांधी चौक, कचहरी अड्डा और शीला चौक जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सांस्कृतिक दलों के माध्यम से प्रभावशाली नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया जा रहा है। इन नुक्कड़ नाटकों के जरिए कांगड़ा कार्निवाल में नशे के खिलाफ अभियान का संदेश आम जनता तक सरल और भावनात्मक अंदाज में पहुंचाया जा रहा है। नाटकों में दिखाया जा रहा है कि किस तरह चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थ न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी बर्बाद कर देते हैं।
उपायुक्त ने कहा, “नशा आज समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। खासकर युवा पीढ़ी को इससे बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जिले से चिट्टा सहित सभी प्रकार के नशीले पदार्थों को जड़ से खत्म करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और समाज के सभी वर्ग मिलकर निरंतर प्रयास कर रहे हैं। कांगड़ा कार्निवाल में नशे के खिलाफ अभियान इसी सोच का एक मजबूत उदाहरण है, जिसमें जन-सहभागिता को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई को प्रदेश स्तर पर और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिमला, धर्मशाला, हमीरपुर और बिलासपुर में एंटी-चिट्टा रैलियों का आयोजन किया गया है। इन रैलियों के माध्यम से पूरे हिमाचल प्रदेश में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। रैलियों में युवाओं, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे अभियान को नई ऊर्जा मिली है।
उपायुक्त हेम राज बैरवा ने आगे जानकारी दी कि जिले में चिन्हित रेड जोन पंचायतों में विशेष रूप से नशा निवारण समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य केवल निगरानी करना ही नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को सही मार्गदर्शन, परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर काम कर रही ये समितियां स्थानीय लोगों के सहयोग से सूचनाएं एकत्र कर रही हैं और प्रशासन तक पहुंचा रही हैं, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
कांगड़ा प्रशासन का मानना है कि कांगड़ा कार्निवाल में नशे के खिलाफ अभियान जैसे कार्यक्रमों से समाज में सकारात्मक माहौल बनता है और युवाओं को नशे से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। नुक्कड़ नाटकों, रैलियों और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए यह संदेश बार-बार दोहराया जा रहा है कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि नई समस्याओं की जड़ है।
