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भरमौर की बेटी प्रियांजल ठाकुर ने रचा इतिहास! CBSE 12वीं में 97.2% अंक, नवोदय स्कूलों में रही टॉपर (चंडीगढ़ क्षेत्र)

भरमौर की बेटी प्रियांजल ठाकुर ने रचा इतिहास! CBSE 12वीं में 97.2% अंक, नवोदय स्कूलों में रही टॉपर (चंडीगढ़ क्षेत्र)

भरमौर उपमंडल के मलकोता गांव की प्रतिभाशाली छात्रा प्रियांजल ठाकुर ने अकादमिक क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिस पर न केवल उसके परिवार और गांव को, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश को गर्व है। जवाहर नवोदय विद्यालय डुंगरी (हमीरपुर) की छात्रा प्रियांजल ने CBSE कक्षा 12वीं (मानविकी संकाय) में 97.2% अंक (486/500) हासिल कर नवोदय विद्यालय समिति चंडीगढ़ क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त किया है।

📌 यह चंडीगढ़ रीजन के अंतर्गत आने वाले सभी नवोदय विद्यालयों में सर्वाधिक अंक हैं, जो प्रियांजल की कड़ी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। चंडीगढ़ क्षेत्र में 59 नवोदय विद्यालय आते हैं और देश में 8 क्षेत्र हैं। 59 नवोदय विद्यालयों में पहला स्थान प्राप्त करना एक दुर्लभ उपलब्धि है।

📜 नवोदय विद्यालय समिति (चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय) द्वारा विद्यालय को भेजे गए प्रशंसा पत्र में प्रियांजल की इस उपलब्धि को “असाधारण” करार दिया गया है। पत्र में विद्यालय प्रशासन, शिक्षकों और प्रियांजल के परिजनों को विशेष बधाई दी गई है।

👨‍👩‍👧‍👧 प्रियांजल के पिता संजय ठाकुर, जो पंचायत ऑडिटर हैं, ने कहा, “हमारी बेटी की यह सफलता पूरे भरमौर क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा है। हमें उसकी मेहनत और समर्पण पर बेहद गर्व है।”
उनकी माता रजनी देवी, एक गृहिणी हैं, और छोटी बहन नव्या ठाकुर भी जवाहर नवोदय विद्यालय डुंगरी में ही कक्षा 11वीं (नॉन-मेडिकल स्ट्रीम) की छात्रा हैं।

📚 अब प्रियांजल दिल्ली विश्वविद्यालय से इंग्लिश ऑनर्स की पढ़ाई करेंगी। उनकी यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में शिक्षा की बदलती तस्वीर और ग्रामीण बेटियों की बढ़ती भागीदारी का स्पष्ट संकेत है।

🏫 विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया, “प्रियांजल शुरू से ही बेहद मेधावी रही हैं। अनुशासन, निरंतरता और पढ़ाई के प्रति उनकी लगन काबिल-ए-तारीफ है। विद्यालय को उन पर गर्व है।”

💬 शिक्षकों के अनुसार, प्रियांजल पढ़ाई के साथ-साथ सह-पाठ्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं और हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

🎓 उनकी उपलब्धि से यह भी सिद्ध होता है कि यदि समर्पण और मार्गदर्शन सही हो, तो दूर-दराज़ के गांवों से भी छात्राएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।