पालमपुर, कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में सफल करवाने के नाम पर ठगी का एक नया मामला सामने आया है। इस मामले में पालमपुर थाना के तहत सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इनमें से पांच युवक वही हैं, जो लिखित परीक्षा में शामिल हुए थे, और परीक्षा के दौरान ही संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिए गए। शेष दो आरोपियों को पुलिस इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर जवाली से हिरासत में लिया गया।
हालांकि प्रारंभिक जांच में पेपर लीक होने की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी पुलिस विभाग हर संभावित पहलू — पैसों के लेन-देन, तकनीकी माध्यम और रैकेट से संबंधों की गहराई से जांच कर रहा है।
🔍 जांच का दायरा बढ़ा, कड़ी पूछताछ जारी
एसएसपी कांगड़ा शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि इंटेलिजेंस से सूचना मिली थी कि कुछ लोग पैसे लेकर उम्मीदवारों को परीक्षा पास करवाने की गारंटी दे रहे हैं। इसी सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पालमपुर में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा, “यह मामला भर्ती करवाने के नाम पर धोखाधड़ी का लग रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
📍 धर्मशाला में भी दर्ज हैं ऐसे कई मामले
शालिनी अग्निहोत्री ने यह भी बताया कि धर्मशाला क्षेत्र में इस तरह के 4–5 मामले पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। हाल ही में खनियारा में आर्मी भर्ती को लेकर भी इसी तरह की ठगी का मामला सामने आया था। पालमपुर में भी पुलिस भर्ती परीक्षा को पास करवाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश की गई है।
📛 जवाली के पुराने शातिर फिर गिरफ्त में
इस मामले में जवाली निवासी विक्रम व वलविंद्र उर्फ सोनू जरयाल को भी हिरासत में लिया गया है। ये दोनों पहले भी 2019 में अवैध ब्लूटूथ डिवाइस के प्रयोग और 2022 में पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में संलिप्त पाए गए थे।
पुलिस का मानना है कि ये दोनों अभियुक्त भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी संगठित ठगी का हिस्सा हो सकते हैं। इनके पिछले रिकॉर्ड और नेटवर्क को देखते हुए, जांच एजेंसियों ने इनके संपर्कों और भूमिका को गहराई से खंगालना शुरू कर दिया है।
🚔 भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर
एसएसपी शालिनी अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल पुलिस भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा, “ऐसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। कानून अपना कार्य पूरी सख्ती से करेगा।”
यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि भर्ती परीक्षाओं के दौरान तकनीकी धोखाधड़ी और पैसों के लालच से युवाओं को बरगलाने वाले गिरोह सक्रिय हैं, जिन पर नजर रखना और कानूनी कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है।
