पाठशाला प्रबंधन समिति ने सरकार से की मांग – राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भरमौर का न किया जाए विलय
भरमौर (चंबा)। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भरमौर की पाठशाला प्रबंधन समिति (SMC) ने सरकार के संभावित स्कूल विलय निर्णय के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। 20 अप्रैल 2025 को विद्यालय परिसर में आयोजित बैठक में अध्यक्षा श्रीमती बबली देवी की अध्यक्षता में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि विद्यालय का किसी अन्य स्कूल के साथ विलय स्वीकार नहीं होगा।
70 वर्षों की ऐतिहासिक धरोहर
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यह विद्यालय वर्ष 1954 में भरमौर क्षेत्र की बेटियों की शिक्षा के लिए स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना महान तपस्वी श्री जय कृष्ण गिरी जी महाराज के आशीर्वाद और भरमौर वासियों की मांग पर हुई थी। तभी से यह विद्यालय 84 मंदिरों की ऐतिहासिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करता है।
250+ छात्राएं और इंग्लिश मीडियम की शुरुआत
वर्तमान में विद्यालय में 250 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए वर्ष 2023 से इंग्लिश मीडियम कक्षाएं भी आरंभ की गईं हैं। समिति ने यह तर्क दिया कि इस तरह के स्कूलों का विलय न केवल लड़कियों की शिक्षा के अवसरों को सीमित करेगा, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी अनुचित होगा।
मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री को भेजा जाएगा प्रस्ताव
SMC ने निर्णय लिया कि यह प्रस्ताव श्री ललित ठाकुर (उपाध्यक्ष, आदिवासी जनजातीय कांग्रेस हिमाचल) एवं श्री रवि दत्त शर्मा (सदस्य, जनजातीय परामर्श समिति) के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षामंत्री श्री रोहित ठाकुर को भेजा जाएगा, ताकि विद्यालय के अस्तित्व को बनाए रखा जा सके।
सदस्य एकमत: लड़कियों की शिक्षा से न किया जाए समझौता
SMC की बैठक में उपस्थित अभिभावकों और सदस्यों ने एकमत से कहा कि,
“यह विद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह हमारी बेटियों के आत्मविश्वास, स्वावलंबन और सामाजिक उत्थान की पहचान है। इसे विलय करना स्थानीय जनभावनाओं के साथ अन्याय होगा।”

