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भरमौर का सबसे बड़ा घोटाला? 24 करोड़ खर्च के बाद भी अधूरी सिविल अस्पताल की इमारत सवालों के घेरे में

भरमौर का सबसे बड़ा घोटाला? 24 करोड़ खर्च के बाद भी अधूरी सिविल अस्पताल की इमारत सवालों के घेरे में

भरमौर, 07 अप्रैल, 2025: भरमौर में नव निर्मित सिविल अस्पताल की इमारत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस अस्पताल की निर्माण प्रक्रिया न केवल अत्यधिक विलंबित रही है, बल्कि इससे जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक खामियों ने इसे भरमौर का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला बना दिया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस अस्पताल का निर्माण कार्य एम्स बिलासपुर से भी अधिक समय से चल रहा है। जहां एम्स बिलासपुर का निर्माण कार्य 2017 में शुरू होकर पूरा हो चुका है, वहीं भरमौर का अस्पताल करीब 24 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद आज तक पूरा नहीं हो पाया

लगभग 24 करोड़ खर्च, लेकिन अस्पताल अधूरा

हाल ही में हुई निरीक्षण बैठक में जो खामियां सामने आई हैं, वे चौंकाने वाली हैं:

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पार्किंग सुविधा का अभाव तो सभी को दिखता है इसके लिए किसी कमेटी की जांच की आवश्यकता नहीं है।

सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद यह अधूरी, असंगठित और खराब डिजाइन वाली इमारत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

तुलनात्मक रूप से देखें तो, भरमौर में ही बनी सरकारी डिग्री कॉलेज की कंक्रीट बिल्डिंग, जो इससे लगभग 2 गुना बड़ी है, का निर्माण इस अस्पताल से लगभग आधी लागत में पूरा किया गया है।

भ्रष्टाचार की बू?

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह निर्माण कार्य न केवल तकनीकी रूप से दोषपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका भी ज़ाहिर की जा रही है। इतने बड़े स्तर पर व्यय, वर्षों का विलंब और फिर इस तरह की कमियाँ, यह सब मिलकर एक संगठित घोटाले की ओर इशारा करते हैं। अफसोस यह है कि भरमौर की इतनी भयानक समस्या के लिए कोई आवाज नहीं उठाता।

क्या हो पाएगी उच्च स्तरीय जांच?

प्रशासन को अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि

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