शिमला (रोज़ाना24 ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश में जहां आउटसोर्स भर्तियों का लगातार विरोध जारी है, वहीं अब स्कूलों में भी आउटसोर्स आधार पर बड़े पैमाने पर भर्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में योग शिक्षक, करियर काउंसलर, आया और हेल्पर, स्पेशल एजुकेटर सहित कुल 6643 पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्तियां की जा रही हैं। इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और अनुबंध आधार पर सेवाएं देनी होंगी, जिससे राज्य में एक बार फिर नौकरी की अस्थिरता पर बहस छिड़ गई है।
🔍 भर्तियां होंगी नायलट शिमला के माध्यम से
इन भर्तियों के लिए नायलट (NIELIT) शिमला को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 28 अप्रैल 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अधिसूचना और आवेदन फॉर्म नायलट शिमला की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके लिए ₹500 की एप्लिकेशन फीस रखी गई है।
📝 भर्तियों का विस्तृत विवरण
पद | पदों की संख्या | मानदेय प्रति माह |
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योग शिक्षक | 124 | ₹6789 |
करियर गाइडेंस काउंसलर | 124 | ₹17068 |
आया/हेल्पर | 6202 | ₹4075 |
स्पेशल एजुकेटर | 193 | ₹16385 |
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सभी नियुक्तियां पार्ट-टाइम और आउटसोर्स आधार पर की जा रही हैं, जिनकी नियुक्ति हिमाचल के किसी भी जिले में हो सकती है।
🧒 प्री-प्राइमरी बच्चों की देखभाल के लिए होंगी आया नियुक्त
राज्य सरकार ने स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ रहे 25,000 से अधिक बच्चों की देखभाल के लिए 6297 आया की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, जो आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाएगी। वर्तमान में राज्य में प्री-प्राइमरी अध्यापक भी आउटसोर्स आधार पर ही रखे जा रहे हैं।
इस भर्ती के लिए स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन को अधिकृत किया गया है, और यह पूरी प्रक्रिया समग्र शिक्षा अभियान के बजट से वित्त पोषित होगी।
🧘 पीएमश्री स्कूलों में भी होंगे योग प्रशिक्षक
भारत सरकार की पीएमश्री योजना के तहत चयनित 180 स्कूलों में भी योग प्रशिक्षकों की भर्ती की जा रही है। इन प्रशिक्षकों की नियुक्ति भी आउटसोर्सिंग मॉडल पर आधारित है।
🚨 बेरोजगारों में बढ़ रहा असंतोष
राज्य में बेरोजगारी दर बढ़ने और नियमित भर्ती प्रक्रिया में देरी के चलते युवाओं में आउटसोर्स भर्तियों को लेकर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। बेरोजगार युवाओं का कहना है कि सरकार आउटसोर्सिंग के ज़रिए सस्ती मजदूरी पर काम करवा रही है, जबकि स्थायी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे लाखों युवाओं को ठगा जा रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि स्कूलों जैसी संवेदनशील संस्थाओं में स्थायी और प्रशिक्षित स्टाफ ही शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है। आउटसोर्सिंग से जवाबदेही कमजोर होती है और शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ता है।
एक युवा अभ्यर्थी ने कहा:
“हम वर्षों से शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमें ठेके पर भेजना चाहती है। यह शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया गया है।”
📌 सरकार के लिए चुनौती: गुणवत्ता बनाम लागत
सरकार एक ओर जहां शिक्षा के क्षेत्र में PM SHRI और समग्र शिक्षा जैसे मिशनों के तहत सुधार लाने की बात कर रही है, वहीं आउटसोर्सिंग के ज़रिए भर्तियों ने नीतिगत अस्थिरता और कर्मचारी असंतोष को जन्म दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी उभर सकता है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव निकट हों।