हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच भिंडरावाला झंडा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामला तब शुरू हुआ जब हिमाचल प्रदेश के एक व्यक्ति (नाम नहीं लिखा जा रहा लेकिन सब जानते हैं) और उसके साथियों ने पंजाब से आए कुछ युवकों की बाइकों पर लगे भिंडरावाला के झंडे जबरन हटाने की कोशिश की। इस घटना के बाद दोनों पक्षों में झड़प हुई और माहौल गरमा गया। उधर पंजाब के कुछ शरारती तत्वों ने भी मौके का फायदा उठा कर देश विरोधी गतिविधियां तेज कर दी। अब स्थिति यह है कि विवाद थमने के बजाय, इसे और भड़काने की कोशिशें जारी हैं।
❌ कानून हाथ में लेना क्यों गलत?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी गलती यह रही कि कुछ लोगों ने कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की। अगर किसी को भिंडरावाला के झंडे से आपत्ति थी, तो सही तरीका यह था कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाती और कानून अपना काम करता। लेकिन सड़क पर ही फैसले करने की प्रवृत्ति न केवल कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे समाज में भी तनाव बढ़ता है।
👉 अगर हर विवाद सड़क पर ही हल करने लगें, तो फिर पुलिस और न्यायपालिका की क्या जरूरत?
👉 क्या हम इतने गैर-जिम्मेदार हो गए हैं कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए लाखों लोगों की जान खतरे में डाल दें?
🏴 झंडा हटाने की कोशिश या राजनीतिक स्टंट?
यह मामला केवल एक झंडे का नहीं रह गया है। यह उन लोगों के लिए राजनीतिक मंच बन चुका है जो समाज को बांटकर अपना फायदा देख रहे हैं।
🗣 “आरएसएस का सपना है अखंड भारत, लेकिन इसे पूरा करने के लिए संयम और धैर्य की जरूरत है। अगर लोग स्वयंसेवक बन कर इस तरह की हरकतें करते रहेंगे, तो अखंड भारत बनना तो दूर, वर्तमान भारत के भी और भी टुकड़े हो सकते हैं।”
इस विवाद को सुलझाने के बजाय अब वो व्यक्ति लगातार इंटरव्यू देकर इस मामले को भड़काने की कोशिश में लगे हैं। अगर यही रवैया जारी रहा, तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
राजनीति के नाम पर समाज को न बांटें
यह कोई साधारण झगड़ा नहीं है। यह उन लोगों के लिए एक राजनीतिक मंच बन गया है, जो समाज को बांटकर अपनी रोटियां सेंकना चाहते हैं। भिंडरावाला का झंडा हटाना या न हटाना यह मुद्दा नहीं है, बल्कि मुद्दा यह है कि हम अपनी राजनीति चमकाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं। क्या इतना भी नहीं समझ में आता कि इस तरह की हरकतें देशभक्ति नहीं बल्कि देश के साथ गद्दारी है?
✅ क्या किया जाना चाहिए था?
✔ अगर किसी को झंडे से आपत्ति थी, तो उसे पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी।
✔ झगड़े और हिंसा से बचते हुए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
✔ मीडिया और सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयान देने से बचना चाहिए।
अब क्या करना होगा?
✔ कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
✔ जनता को अफवाहों और भड़काऊ बयानों से बचना चाहिए।
✔ मीडिया को भी जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करनी चाहिए, न कि विवाद को बढ़ावा देना चाहिए।
🚫 ऐसे विवाद देश के लिए खतरनाक
अगर हर कोई कानून को अपने हाथ में लेने लगे, तो देश की व्यवस्था बिखर जाएगी। लोकतंत्र में हर समस्या का समाधान कानून और संविधान के तहत होना चाहिए, न कि हिंसा और अराजकता के जरिए।
✋ अब भी समय है—ऐसी हरकतों से बचें और देश की एकता बनाए रखें! ✋