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मणिमहेश यात्रा मार्ग पर शौचालय समय पर बने ही नहीं, क्या अब बिना बने ही बर्फ की भेंट चढ़ जाएंगे सवा करोड़ के शौचालय

मणिमहेश यात्रा मार्ग पर शौचालय समय पर बने ही नहीं, क्या अब बिना बने ही बर्फ की भेंट चढ़ जाएंगे सवा करोड़ के शौचालय

भरमौर (चम्बा)हिमाचल प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक श्री मणिमहेश यात्रा के दौरान स्वच्छता सुविधाओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मणिमहेश ठेकेदार यूनियन ने प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि यात्रा मार्ग पर शौचालय निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा नहीं हुआ, जिससे लाखों श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को भारी असुविधा तो झेलनी ही पड़ी, लेकिन यह भी सवाल उठ रहा है कि जब शौचालय मणिमहेश यात्रा से पहले बने ही नहीं तो उनका निर्माण यात्रा के बाद कहाँ तक जायज है? खासकर तब जब सर्दियों की भारी बर्फबारी में अक्सर कई निर्माण ढह जाते हैं। क्या यह ट्रस्ट के सवा करोड़ रुपये का सीधा नुकसान नहीं?

अब लोग इस तरह की कार्यप्रणाली पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार का आरोप लगाएंगे या नहीं, यह तो वक्त और इन शौचालयों की उम्र ही बताएगी।

ठेकेदार यूनियन का आरोप

यूनियन का कहना है कि शौचालय निर्माण का ठेका M/s Bansal Industrial Corporation (नादौन, हमीरपुर) को दिया गया था। इस कार्य को पूरा करने के लिए 40 दिन की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन निर्धारित अंतिम तिथि 17 अगस्त 2025 तक भी निर्माण कार्य अधूरा रहा।

यूनियन के अनुसार, मौके पर तैनात जूनियर इंजीनियर (JE) ने भी यह स्वीकार किया कि काम पूरा नहीं हुआ। यूनियन ने मांग की है कि टेंडर शर्तों के तहत ठेकेदार पर 10% पेनल्टी (लगभग ₹12 लाख) लगाई जाए।

यूनियन अध्यक्ष ने कहा—
“हमने पत्र के माध्यम से प्रशासन को सूचित किया है। न केवल काम अधूरा छोड़ा गया है, बल्कि जो निर्माण हुआ है उसमें भी गंभीर गुणवत्ता संबंधी खामियां पाई गई हैं। ठेकेदार की कार्यप्रणाली संदिग्ध है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”

मणिमहेश यात्रा के बाद शौचालय निर्माण किसलिए

श्री मणिमहेश यात्रा का आधिकारिक आयोजन 16 से 31 अगस्त 2025 तक हो रहा है। 17 अगस्त तक भी टॉयलेट ब्लॉक तैयार न होने से श्रद्धालुओं को खुले में शौच करने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा।

भरमौर के एक स्थानीय दुकानदार ने कहा –
“जब यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएँ ही पूरी नहीं हुईं, तो पूरा ₹1.25 करोड़ खर्च करने का क्या मतलब रह गया? यह पैसा बर्बाद हुआ है। दंड सिर्फ 10% लगाना काफी नहीं है, पूरा काम अगले साल दोबारा होना चाहिए। जब यात्रा के समय शौचालय बने ही नहीं तो यात्रा के बाद इन्हें कौन देखेगा?”

एक अन्य भरमौर निवासी ने कहा –
“इस बात को कौन सत्यापित करेगा कि कहीं शौचालय बिना बनाए ही यह न कह दिया जाए कि सर्दियों की बर्फबारी से हिमस्खलन में शौचालय बह गए? खुद बंसल यह आरोप लगा चुके हैं कि पहले के हजारों शौचालय गायब हैं।”

स्थानीय लोग यह भी बता रहे हैं कि यह पहली बार नहीं है। इसी ठेकेदार पर पहले भी भरमौर पुराने बस अड्डे पर शौचालय निर्माण में करीब एक साल की देरी का आरोप लग चुका है।

यूनियन की चेतावनी और जांच की मांग

ठेकेदार यूनियन ने एडीएम भरमौर को दिए पत्र में कहा है कि—

  • ठेकेदार पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाए।
  • कार्य की गुणवत्ता और देरी की स्वतंत्र जांच करवाई जाए।
  • भविष्य में ऐसे ठेकेदारों को सरकारी कार्यों से वंचित किया जाए।

यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले को विजिलेंस विभाग तक ले जाएंगे।