हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) निर्माण कार्यों में लापरवाही के खिलाफ जनता का आक्रोश तेज होता जा रहा है। शिमला के उपायुक्त और एसडीएम कार्यालयों में अब तक करीब 700 से 800 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
राज्य के लोक निर्माण मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि एनएच कटिंग के कारण दर्जनों घरों को नुकसान, बागीचों का नाश और कई जानें भी गई हैं। उन्होंने कहा,
“एनएच निर्माण की प्रक्रिया में यदि सही तरीके से कटिंग नहीं की जाती, तो उसका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। कई इलाकों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं।”
🏚️ शिमला में मकान गिरने और बागीचे नष्ट होने की घटनाएं
एनएच निर्माण से जुड़ी शिकायतों में शिमला, रोहड़ू, जुब्बल, रामपुर और ठियोग जैसे क्षेत्रों में मकानों के ढहने, जमीन धंसने और सेब-बागीचों के नष्ट होने की घटनाएं प्रमुख रूप से दर्ज की गई हैं। कई शिकायतें वर्षों पुरानी हैं लेकिन मुआवजा प्रक्रिया और पुनर्वास योजनाएं अधूरी हैं।
🛣️ भरमौर में भी 8 वर्षों से खराब हालत में है NH निर्माण
सिर्फ शिमला ही नहीं, बल्कि चंबा जिले के जनजातीय उपमंडल भरमौर में भी राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण पिछले 8-9 वर्षों से अधर में लटका हुआ है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि न केवल सड़क अधूरी है, बल्कि जो हिस्से बने हैं, वहां पर भी ड्रेनेज, वॉल और सुरक्षा उपायों की भारी कमी है। अभी भी जो कार्य हो रहा है उसकी गुणवता पर सवाल है।
स्थानीय युवा संगठनों और पंचायत प्रतिनिधियों ने बार-बार मांग की है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण को पारदर्शी, गुणवत्ता आधारित और समयबद्ध बनाया जाए।
📑 किसके जिम्मे जवाबदेही?
इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक माना जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और प्रभावितों ने यह भी आरोप लगाया है कि कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा अनियोजित कटिंग, उचित स्लोपिंग और रिटेनिंग वॉल का अभाव आपदाओं का कारण बन रहा है।
🗣️ क्या बोले मंत्री अनिरुद्ध सिंह?
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा,
“हमें सिर्फ सड़कों का निर्माण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ विकास करना है। आने वाले समय में एनएच निर्माण से जुड़े सभी प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी तय है।”
