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चंबा मेडिकल कॉलेज में मासूम की मौत: जांच रिपोर्ट तैयार, सोमवार को हो सकता है बड़ा एक्शन

चंबा मेडिकल कॉलेज में मासूम की मौत: जांच रिपोर्ट तैयार, सोमवार को हो सकता है बड़ा एक्शन

चंबा मेडिकल कॉलेज में डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट तैयार हो गई है। पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल चंबा में उपचार के दौरान हुई मासूम कृतिका की मौत को लेकर गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। अब सोमवार को रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन आगामी कार्रवाई करेगा। मामले में परिजनों ने उपचार में देरी और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए थे।

तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश, एक सप्ताह में हुई तैयार

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी को प्रारंभिक तौर पर तीन दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, जांच प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित तथ्यों को जुटाने में करीब एक सप्ताह का समय लगा। अब रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रबंधन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कदम उठाया जाएगा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि मामले में आरोपों को गंभीरता से लिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।

6 सितंबर को अस्पताल पहुंचे थे बच्ची के पिता

यह मामला 6 सितंबर का है। चुराह उपमंडल की सेईकोठी पंचायत के गांव नरवाड़ निवासी कुलदीप सिंह अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी कृतिका को उपचार के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। पिता के अनुसार बच्ची की छाती जाम थी और उसमें खून की कमी के लक्षण दिखाई दे रहे थे। बेहतर और त्वरित उपचार की उम्मीद में परिवार बच्ची को लेकर चंबा पहुंचा था।

परिजनों का आरोप है कि शाम करीब चार बजे अस्पताल पहुंचने के बावजूद बच्ची को तत्काल भर्ती नहीं किया गया। बाद में भर्ती किए जाने के बाद एक्स-रे और अन्य जांचों के लिए उन्हें इधर-उधर जाना पड़ा। परिवार ने दावा किया कि एक्स-रे के लिए भेजे जाने पर वहां तत्काल कोई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं था और कुछ जांचों के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ा।

परिजनों का आरोप—करीब 45 मिनट तक नहीं मिला उपचार

बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए उपचार में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि बच्ची की हालत लगातार बिगड़ रही थी और करीब 45 मिनट तक कोई डॉक्टर उसकी सुध लेने नहीं पहुंचा।

परिजनों के मुताबिक, मौत से लगभग 15 मिनट पहले एक डॉक्टर वहां पहुंचे। इसके बाद बच्ची को इंजेक्शन लगाने और भाप देने की बात सामने आई। परिवार का आरोप है कि इसके बाद बच्ची अचेत हो गई और उसकी मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों से ही होनी है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी यह स्पष्ट किया गया था कि उस समय लापरवाही के आरोपों की जांच बाकी थी।

अस्पताल प्रबंधन ने कहा—रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई

घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया था। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप ने कहा था कि परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया गया है और जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट तैयार होने के बाद सोमवार को प्रबंधन के स्तर पर अगला कदम उठाया जाना है। जांच रिपोर्ट में उपचार के दौरान क्या परिस्थितियां रहीं, बच्ची को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिली या नहीं और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की भूमिका क्या रही—इन सवालों के जवाब कार्रवाई की दिशा तय करने में अहम होंगे।

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