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चौरासी मंदिर भरमौर: 1400 साल पुरानी आस्था नगरी, कंगना रनौत ने बताया था ‘देवभूमि का आध्यात्मिक हृदय’

चौरासी मंदिर भरमौर: 1400 साल पुरानी आस्था नगरी, कंगना रनौत ने बताया था ‘देवभूमि का आध्यात्मिक हृदय’

चौरासी मंदिर भरमौर हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की एक ऐसी धार्मिक धरोहर है, जो करीब 1400 वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। भरमौर कस्बे के मध्य स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर परिसर अपनी अद्भुत वास्तुकला, पौराणिक कथाओं और धार्मिक महत्व के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है। “चौरासी” का अर्थ हिंदी में 84 होता है और इस परिसर में मौजूद 84 छोटे-बड़े मंदिरों के कारण इसे चौरासी मंदिर परिसर कहा जाता है।

7वीं शताब्दी में बना था चौरासी मंदिर परिसर

इतिहासकारों के अनुसार चौरासी मंदिर परिसर का निर्माण लगभग 7वीं शताब्दी में हुआ था। हालांकि समय-समय पर कई मंदिरों का जीर्णोद्धार भी किया गया। परिसर के केंद्र में स्थित भगवान शिव को समर्पित मणिमहेश मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण माना जाता है। मंदिर की शिखर शैली की वास्तुकला श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।

मान्यता है कि कुरुक्षेत्र से आए 84 सिद्ध योगी मणिमहेश यात्रा के दौरान भरमौर पहुंचे थे। यहां की शांत और आध्यात्मिक वादियों से प्रभावित होकर उन्होंने यहीं तपस्या करने का निर्णय लिया। बाद में इन्हीं 84 सिद्धों की स्मृति में यह मंदिर परिसर स्थापित किया गया।

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राजा साहिल वर्मन और 84 योगियों की कथा

चौरासी मंदिर परिसर से जुड़ी एक और प्रसिद्ध लोककथा राजा साहिल वर्मन से संबंधित है। कहा जाता है कि ब्रह्मपुरा (वर्तमान भरमौर) के राजा साहिल वर्मन के यहां कोई संतान नहीं थी। तभी 84 योगी यहां पहुंचे और राजा की अतिथि सेवा से प्रसन्न होकर उन्हें दस पुत्रों का आशीर्वाद दिया।

कुछ समय बाद राजा को दस पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई। पुत्री का नाम चंपावती रखा गया, जिसके नाम पर आगे चलकर चंबा नगर बसाया गया। माना जाता है कि राजा ने 84 योगियों के सम्मान में इस मंदिर परिसर का निर्माण करवाया और इसका नाम “चौरासी” रखा गया।

चौरासी मंदिर परिसर के प्रमुख आकर्षण

भरमौर स्थित चौरासी मंदिर परिसर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां मौजूद प्रमुख मंदिरों में शामिल हैं:

यहां स्थित धर्मेश्वर महादेव मंदिर विशेष महत्व रखता है, जिसे भगवान धर्मराज का विश्व का एकमात्र मंदिर माना जाता है।

अर्धगंगा कुंड में श्रद्धालु करते हैं पवित्र स्नान

चौरासी मंदिर परिसर में स्थित अर्धगंगा पवित्र कुंड भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। जन्माष्टमी और मणिमहेश यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस जल में स्नान करने से आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।

कंगना रनौत ने भरमौर को बताया ‘देवभूमि की आत्मा’

भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भरमौर का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने चौरासी मंदिर परिसर में दर्शन कर कहा था:

“भरमौर और चौरासी मंदिर परिसर हिमाचल की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक हैं। यहां आकर मन को अद्भुत शांति मिलती है।”

इसके बाद 2025 में पुनः भरमौर यात्रा के दौरान कंगना रनौत ने कहा:

“चौरासी मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिमाचल की संस्कृति और इतिहास की जीवित पहचान हैं। हर सनातन श्रद्धालु को यहां जरूर आना चाहिए।”

पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में बढ़ रही पहचान

बीते कुछ वर्षों में चौरासी मंदिर भरमौर की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। मणिमहेश यात्रा के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हिमाचल पर्यटन विभाग भी इस ऐतिहासिक धरोहर को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला और आध्यात्मिक वातावरण के कारण भरमौर का चौरासी मंदिर परिसर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है।

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