‘Jag Laadki’ पोत से भारत को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की सप्लाई बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया था। इसी बीच भारतीय झंडे वाला टैंकर ‘Jag Laadकी’ 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंचा है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है। ⚓🛢️
यूएई से लाया गया कच्चा तेल
अधिकारियों के अनुसार, ‘Jag Laadकी’ में लाया गया कच्चा तेल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह पोर्ट से लोड किया गया था।
यह पोत लगभग:
- 274 मीटर लंबा
- 50 मीटर चौड़ा
- 1.64 लाख टन डेडवेट क्षमता
का है, जो बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की ढुलाई में सक्षम है।

ऊर्जा संकट के बीच अहम सप्लाई
पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं, जो दुनिया के प्रमुख ऊर्जा ट्रांजिट रूट्स में से एक है।
ऐसे में ‘Jag Laadकी’ का सुरक्षित मुंद्रा पोर्ट पहुंचना भारत के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
LPG सप्लाई भी जारी
इससे पहले:
- ‘Nanda Devi’ पोत 46,500 MT LPG लेकर वाडिनार पोर्ट पहुंचा
- ‘Shivalik’ पोत भी LPG लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंच चुका है
इन लगातार शिपमेंट्स से संकेत मिलता है कि भारत ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।
भारत की ऊर्जा निर्भरता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है:
- 88% कच्चा तेल आयात
- 50% प्राकृतिक गैस
- 60% LPG आयात
इसमें से अधिकांश सप्लाई मध्य पूर्व (सऊदी अरब, UAE) से आती रही है।
मुंद्रा पोर्ट की बढ़ी भूमिका
Adani Ports द्वारा संचालित मुंद्रा पोर्ट ने इस शिपमेंट को सुरक्षित रूप से हैंडल किया। कंपनी के अनुसार, यह पोर्ट भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की डिलीवरी से रिफाइनरियों को संचालन बनाए रखने में मदद मिलती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
सप्लाई में चुनौतियां बरकरार
हालांकि भारत ने रूस जैसे अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाकर कुछ हद तक स्थिति संभाली है, लेकिन:
- गैस सप्लाई में कटौती
- LPG की सीमित उपलब्धता
जैसी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं, खासकर व्यावसायिक क्षेत्रों में।
