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₹207 करोड़ की ‘शिशु संकल्प योजना’ लॉन्च, कुपोषण के खिलाफ हिमाचल सरकार का बड़ा कदम

₹207 करोड़ की ‘शिशु संकल्प योजना’ लॉन्च, कुपोषण के खिलाफ हिमाचल सरकार का बड़ा कदम

‘शिशु संकल्प योजना’ के तहत Himachal Pradesh सरकार ने कुपोषण के खिलाफ बड़ी पहल करते हुए ₹207 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। सरकार का दावा है कि यह योजना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने, एनीमिया कम करने और प्रदेश में कुपोषण की दर घटाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।

राज्य सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत इस योजना में आंगनवाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने, पोषण ट्रैकिंग को डिजिटल करने और गर्भवती महिलाओं व छह वर्ष तक के बच्चों को विशेष पोषण आहार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।


क्या है ‘शिशु संकल्प योजना’?

‘शिशु संकल्प योजना’ का मुख्य उद्देश्य 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं को संतुलित पोषण उपलब्ध कराना है। इसके तहत:

  • आंगनवाड़ी केंद्रों में पौष्टिक आहार की गुणवत्ता सुधार
  • गंभीर कुपोषित बच्चों की विशेष पहचान और निगरानी
  • एनीमिया मुक्त अभियान को मजबूत करना
  • डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए स्वास्थ्य डेटा ट्रैकिंग

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, “यह योजना कुपोषण को जड़ से खत्म करने की दिशा में ठोस प्रयास है। हर लाभार्थी का डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा।”


किन विभागों की होगी भागीदारी?

इस योजना को महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के समन्वय से लागू किया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे बच्चों के वजन, लंबाई और स्वास्थ्य स्थिति की नियमित जांच कर सकें।


डिजिटल मॉनिटरिंग पर जोर

‘शिशु संकल्प योजना’ में टेक्नोलॉजी का विशेष उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक लाभार्थी का स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इससे:

  • कुपोषित बच्चों की पहचान जल्दी होगी
  • जरूरतमंद परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचेगी
  • जिला स्तर पर निगरानी मजबूत होगी

सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में गंभीर कुपोषण के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जाए।


ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस

प्रदेश के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या को देखते हुए योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों को अतिरिक्त संसाधन और पोषण किट उपलब्ध कराई जाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो यह राज्य के मानव विकास सूचकांक (HDI) को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती है।


सरकार का लक्ष्य

राज्य सरकार का उद्देश्य है कि हिमाचल को कुपोषण मुक्त राज्य बनाया जाए। ₹207 करोड़ की यह योजना मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बड़े निवेशों में से एक मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि योजना के तहत नियमित ऑडिट और मूल्यांकन भी किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।