मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत ऊना जिले में अनाथ बच्चों के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने शुक्रवार को योजना के तहत जिले के 10 पात्र लाभार्थियों को विवाह सहायता की शेष राशि जारी की। प्रत्येक लाभार्थी को 60-60 हजार रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में प्रदान की गई, ताकि उन्हें शादी के बाद भी भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मिलती रहे।
उपायुक्त जतिन लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत प्रत्येक पात्र अनाथ बच्चे को विवाह के लिए कुल 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि इसमें से 1 लाख 40 हजार रुपये की राशि विवाह के समय पहले ही उपलब्ध करवाई जा चुकी थी, जबकि शेष 60 हजार रुपये अब लाभार्थियों के नाम फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जारी किए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनाथ बच्चों को विवाह उपरांत भी आर्थिक मजबूती मिल सके।
इस अवसर पर उपायुक्त जतिन लाल ने कहा,
“प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में अनाथ बच्चों के समग्र कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह और आर्थिक सुरक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।”
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना केवल विवाह सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य अनाथ बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, व्यावसायिक प्रशिक्षण, गृह निर्माण और स्वयं का स्टार्टअप शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
उपायुक्त ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि ऊना जिले में बीते दो वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत लगभग पौने चार करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। इससे जिले के निराश्रित और अनाथ बच्चों को न केवल आर्थिक सुरक्षा मिली है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्राप्त हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी अनाथ बच्चा संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए। योजना के माध्यम से बच्चों को शिक्षा से लेकर रोजगार तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें। उपायुक्त जतिन लाल ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि योजना का लाभ सही पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।
इस कार्यक्रम के दौरान एकीकृत बाल विकास परियोजना के जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र कुमार भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजना के लाभार्थियों की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि उन्हें समय पर सहायता मिलती रहे और किसी भी प्रकार की समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना को लेकर लाभार्थियों और उनके परिवारों में भी संतोष देखने को मिला। लाभार्थियों ने सरकार और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि इस सहायता से उन्हें न केवल विवाह में मदद मिली है, बल्कि भविष्य की आर्थिक चिंताओं से भी राहत मिली है।
