चंबा जिले में किडनी रोग से पीड़ित मरीजों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब जिले के मरीजों को डायलिसिस के लिए लंबी दूरी तय कर मेडिकल कॉलेज चंबा तक नहीं जाना पड़ेगा। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत जिले के चार नागरिक अस्पतालों—किहार, भरमौर, तीसा और चुवाड़ी में जल्द ही डायलिसिस सेंटर खोले जाने की तैयारी है। इससे दूर-दराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इन चारों नागरिक अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा के लिए डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की अलग से तैनाती की जाएगी। खास बात यह है कि यह स्टाफ केवल डायलिसिस सेंटर में आने वाले मरीजों की सेवाओं के लिए ही नियुक्त होगा, जिससे उपचार की गुणवत्ता और नियमितता बनी रहेगी।
NHM टीम ने किया निरीक्षण, रिपोर्ट केंद्र को भेजी
नेशनल हेल्थ मिशन की टीम इन चारों नागरिक अस्पतालों का निरीक्षण कर चुकी है। निरीक्षण के बाद आवश्यक बुनियादी ढांचे, बिजली, पानी और स्थान की उपलब्धता को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी गई है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही इन डायलिसिस सेंटरों को सुचारु करने की स्वीकृति मिल जाएगी और प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
फिलहाल, चंबा जिले में सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है, जहां पूरे जिले से मरीजों को आना पड़ता है। दुर्गम क्षेत्रों—जैसे भरमौर, तीसा और किहार—से मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना न केवल समयसाध्य होता है, बल्कि आर्थिक और शारीरिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण रहता है।
दूरदराज़ के मरीजों को होगा सीधा फायदा
चार नागरिक अस्पतालों में डायलिसिस सेंटर खुलने से ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों के मरीजों को घर के नजदीक ही इलाज मिल सकेगा। इससे न केवल यात्रा का खर्च कम होगा, बल्कि समय पर डायलिसिस मिलने से मरीजों के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित डायलिसिस न मिलने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है, ऐसे में यह पहल बेहद अहम है।
किडनी रोगियों की बढ़ती संख्या बनी चिंता
देशभर में किडनी रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अनियमित खानपान इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग डायलिसिस सेंटरों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर उपचार मिल सके।
डायलिसिस क्या है और क्यों जरूरी
डायलिसिस उन मरीजों के लिए जरूरी होता है, जिनकी किडनी (गुर्दे) गंभीर रूप से खराब हो चुकी होती हैं और वे खून से विषैले पदार्थ, अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट—जैसे यूरिया और क्रिएटिनिन—को बाहर निकालने में असमर्थ होते हैं। ऐसी स्थिति में डायलिसिस कृत्रिम किडनी की तरह काम करता है और शरीर को साफ रखने में मदद करता है।
स्वास्थ्य विभाग का बयान
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) चंबा डॉ. जालम सिंह भारद्वाज ने बताया,
“जिले के चार नागरिक अस्पतालों में डायलिसिस सेंटर खोलने की दिशा में प्रक्रिया चल रही है। NHM द्वारा सर्वेक्षण किया जा चुका है और जल्द ही इन सेंटरों को शुरू करने की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इससे मरीजों को घर के पास ही राहत मिलेगी।”
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल चंबा जिले के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे किडनी मरीजों के इलाज में सुधार के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा भी मजबूत होगा।
