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जनवरी में पंचायत चुनाव जनजातीय क्षेत्र भरमौर के लिए अनुपयुक्त: आदिवासी कांग्रेस ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, वरिष्ठ नेताओं ने रखे स्पष्ट तर्क

जनवरी में पंचायत चुनाव जनजातीय क्षेत्र भरमौर के लिए अनुपयुक्त: आदिवासी कांग्रेस ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, वरिष्ठ नेताओं ने रखे स्पष्ट तर्क

भरमौर/चंबा, 16 जुलाई 2025। जनजातीय क्षेत्र भरमौर में जनवरी माह में पंचायत चुनाव करवाना अत्यंत कठिन और अव्यवहारिक है — यह बात आज हिमाचल प्रदेश आदिवासी कांग्रेस कमेटी ने भरमौर के उपमंडल दंडाधिकारी अभिषेक मित्तल को सौंपे गए ज्ञापन में कही। कमेटी ने मांग की है कि चुनावों की तिथि जनवरी के स्थान पर अधिक अनुकूल मौसम वाले महीनों में तय की जाए, जिससे अधिकतम मतदाता भागीदारी सुनिश्चित हो सके।


❄️ जनवरी चुनाव से लोकतंत्र प्रभावित, मतदान प्रतिशत गिरता है

ज्ञापन में बताया गया कि 2016 व 2021 के पंचायत चुनावों में भारी बर्फबारी, न्यूनतम तापमान और परिवहन अवरोधों के चलते न केवल मतदान प्रभावित हुआ, बल्कि मतगणना प्रक्रिया भी अत्यधिक कठिन रही। कई स्थानों पर पोलिंग पार्टियों को पैदल बर्फ में चलकर केंद्रों तक पहुंचना पड़ा, और मतगणना टॉर्च व मोबाइल की रोशनी में करनी पड़ी।


🗣️ कमलेश पखरेटिया बोले: “जनजातीय क्षेत्रों में लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है यह शेड्यूल”

पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष व कोऑपरेटिव सोसाइटी ब्लॉक अध्यक्ष कमलेश पखरेटिया ने कहा:

“जनवरी में चुनाव करवाना जनजातीय क्षेत्रों की ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए निर्णय का उदाहरण है। जब 70% लोग पलायन कर चुके होते हैं, तब चुनाव करवाकर हम लोकतंत्र की आत्मा को ही चोट पहुंचाते हैं।”

उन्होंने बताया कि इन हालातों में गांव के बुजुर्ग और महिलाएं मतदान नहीं कर पाते, जिससे चुनाव पूरी तरह पूंजी आधारित हो जाता है और सामान्य उम्मीदवार चुनाव में हिस्सा लेने से वंचित रह जाते हैं।


🗣️ सुरेश ठाकुर ने उठाया खर्च और असमानता का मुद्दा

कांग्रेस वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने भी चिंता जाहिर करते हुए कहा:

“जनवरी में चुनाव करवाने से आम आदमी का उम्मीदवार चुनाव से बाहर हो जाता है। कांगड़ा से भरमौर मतदाता लाना एक सामान्य उम्मीदवार के लिए असंभव है। यह व्यवस्था केवल अमीर उम्मीदवारों के पक्ष में जाती है।”

उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह स्थानीय परिस्थितियों और जनसंख्या प्रवास के आधार पर अलग शेड्यूल निर्धारित करे, अन्यथा मतदान प्रतिशत गिरता रहेगा और असंतोष बढ़ता रहेगा


🛤️ पलायन और मौसम: दोहरी चुनौती

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 15 अक्टूबर के बाद भरमौर के लगभग 70% लोग कांगड़ा व अन्य मैदानी क्षेत्रों में चले जाते हैं। ऐसे में न तो उम्मीदवार भरमौर में प्रचार कर पाते हैं, और न ही लोग चुनाव में भाग लेने के लिए वापसी कर पाते हैं, जब तक कि उन्हें गाड़ियों में लाकर न लाया जाए — जिस पर लाखों रुपये का खर्च आता है।


📌 मुख्य मांगें

  1. भरमौर जैसे जनजातीय क्षेत्रों में जनवरी के स्थान पर अप्रैल या अक्टूबर में चुनाव कराए जाएं।
  2. हिमाचल चुनाव आयोग जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष चुनाव कैलेंडर तैयार करे।
  3. प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि चुनाव प्रभावी, न्यायसंगत और सहभागी हों।

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