लाहौल-स्पीति जिले के विकास खंड उदयपुर की समस्त ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने प्रदेश सरकार द्वारा पंचायतों के खातों में मौजूद अप्रयुक्त धनराशि एवं उस पर अर्जित ब्याज को वापस लेने के निर्णय के विरुद्ध मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन नायब तहसीलदार के माध्यम से भेजा गया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. पंचायत खातों की अप्रयुक्त धनराशि और ब्याज को वापस न लिया जाए
प्रधानों का कहना है कि लाहौल जैसे दुर्गम और जनजातीय क्षेत्र में निर्माण कार्यों की सीमित अवधि, प्राकृतिक परिस्थितियों की चुनौती और तकनीकी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में बाधा बनता है। इस कारण कई बार योजनाओं की स्वीकृत राशि पंचायत खातों में बनी रहती है, जिस पर सरकार द्वारा ब्याज भी वसूला जा रहा है।
प्रधानों ने कहा कि ये राशि पंचायतों के लिए स्थानीय आवश्यकताओं और आपात जरूरतों को पूरा करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। उन्होंने मांग की है कि प्रदेश सरकार द्वारा इस राशि को वापस लेने का निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, और इसके उपयोग हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
2. पंचायतों को गौ-पंजीकरण से जुड़े कार्य न सौंपे जाएं
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि ग्राम पंचायतों को गौ-पंजीकरण और उससे संबंधित तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी न सौंपी जाए। प्रधानों का कहना है कि पहले से ही पंचायतें विभिन्न योजनाओं, निर्माण कार्यों और जनकल्याण गतिविधियों में व्यस्त हैं, ऐसे में अतिरिक्त कार्यभार देना व्यावहारिक नहीं है।
3. उप-खंड उदयपुर का बैंक खाता फिर से उदयपुर में स्थानांतरित किया जाए
वर्ष 2023 में उप विकास खंड उदयपुर का एक प्रमुख खाता ICICI बैंक केलांग में स्थानांतरित कर दिया गया था, जबकि उदयपुर में ही तीन बैंक सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानों ने बताया कि केलांग जैसे दूरस्थ स्थान पर बैंकिंग कार्यवाही में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिससे सरकारी कामों में बाधा आ रही है।
प्रधानों ने मुख्यमंत्री से इस खाते को पुनः उदयपुर स्थित किसी भी बैंक में स्थानांतरित कराने की मांग की है ताकि प्रशासनिक कार्यों में गति लाई जा सके और स्थानीय अधिकारियों व पंचायत प्रतिनिधियों को सुविधा मिल सके।
ज्ञापन में प्रधानों ने अनुरोध किया है कि लाहौल क्षेत्र की विशेष भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएं, जिससे पंचायती राज संस्थाएं प्रभावी और दक्षता से कार्य कर सकें।
