धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की एक अदालत ने राज्य में सरकारी धन के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए बागवानी विभाग के पूर्व अधिकारी को भ्रष्टाचार के संगीन मामले में दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश-सह-अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 कांगड़ा की अदालत ने अपने फैसले में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कुल चार सजाएं सुनाईं, जो साथ-साथ चलेंगी।
धारा 409, 467, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोष सिद्ध
अदालत ने आरोपी को:
- धारा 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास और ₹10,000 का जुर्माना,
- धारा 467 (जालसाजी) के तहत दो वर्ष की कैद और ₹10,000 का जुर्माना,
- धारा 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के तहत दो वर्ष की कैद और ₹10,000 का जुर्माना,
- और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के तहत दो वर्ष की कैद और ₹10,000 का जुर्माना सुनाया है।
जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
कैसे हुआ खुलासा: बड़ा भंगाल के किसान ने दी थी शिकायत
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धर्मशाला के जिला न्यायवादी देवेंद्र चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला तहसील बैजनाथ के बड़ा भंगाल क्षेत्र से जुड़ा है। एक किसान ने वर्ष 2004-05 में बागवानी विभाग द्वारा दी जानी वाली फलदार पौधों की सबसिडी के वितरण में अनियमितता को लेकर राज्य सतर्कता ब्यूरो धर्मशाला में शिकायत दी थी।
किसान ने आरोप लगाया कि विभाग ने किसानों को सबसिडी देने के नाम पर जाली रसीदें तैयार कीं, किसानों के फर्जी दस्तावेज बनाए और उनके नाम पर हस्ताक्षर कर के सबसिडी की राशि बैंक से निकाल ली गई।
जांच में हुआ गबन का खुलासा, जाली चेक और दस्तावेज़ों का किया गया इस्तेमाल
जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी अधिकारी ने किसानों की तरफ से आवेदन पत्र स्वयं तैयार किए, उन पर जाली हस्ताक्षर किए, और उसके बाद बेयरर चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1,82,000 रुपये की सरकारी राशि का गबन कर लिया।
यह पूरी प्रक्रिया दस्तावेज़ी सबूतों के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रमाणित हुई, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर दंड सुनाया।
अदालत ने दी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
यह फैसला हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध न्यायपालिका की सख्त भूमिका को दर्शाता है। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर आम जनता के हक़ को हड़पने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
राज्य सतर्कता ब्यूरो ने भी इस पूरे मामले में सघन और तथ्यपरक जांच कर अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश किए, जिससे दोषी को सजा दिलाने में सफलता मिली।