हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹58,514 करोड़ के बजट को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की संचित निधि से खर्च की अनुमति के लिए विनियोग विधेयक पेश किया, जिसे तीन दिन की चर्चा के बाद मंजूरी मिली।
बजट पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्पित बजट बताया। उन्होंने कहा कि इसमें किसानों, बागबानों, छोटे दुकानदारों और ढाबा संचालकों को आर्थिक राहत देने के प्रावधान किए गए हैं।
किसानों और बागबानों को राहत, छोटे व्यापारियों को लोन से राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट का एक बड़ा हिस्सा किसानों और बागबानों की मदद के लिए रखा गया है। हिमाचल की बागवानी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी।
इसके अलावा छोटे दुकानदारों और ढाबा मालिकों के लिए लोन में राहत देने का प्रावधान किया गया है, जिससे वे अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चला सकें।
विधवा बहनों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार
बजट में समाज के कमजोर वर्गों का भी ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि विधवा बहनों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इससे सिंगल मदर परिवारों को राहत मिलेगी और बच्चों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सकेगी।
पेंशनरों को मिलेगा एरियर का भुगतान
मुख्यमंत्री सुक्खू ने ऐलान किया कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनरों को एरियर का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा। अन्य पेंशनरों को भी चरणबद्ध तरीके से बकाया राशि दी जाएगी, जिससे उन्हें वित्तीय सहायता मिल सके।
युवाओं के लिए सोलर प्रोजेक्ट और इलेक्ट्रिक टैक्सी में सब्सिडी
बेरोजगार युवाओं को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए सब्सिडी देने की योजना बनाई गई है। साथ ही, राज्य में इलेक्ट्रिक टैक्सी को बढ़ावा देने के लिए भी सब्सिडी दी जाएगी, जिससे युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
1000 नए बस रूट, डीजल बसों की खरीद को भी मंजूरी
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार युवाओं को 1000 नए बस रूट देने जा रही है, जिसमें डीजल बसों की खरीद का भी प्रावधान होगा। इससे परिवहन क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बस सेवाएं बेहतर होंगी।
बिजली परियोजनाओं में राज्य का हक सुनिश्चित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की नदियों का पानी राज्य के लिए सोने के समान है और इसे बाहरी कंपनियों के लिए अनिश्चितकाल तक नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार बिजली परियोजनाओं में राज्य के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से बातचीत करेगी।
उन्होंने बताया कि राज्य के जल संसाधनों से बिजली कंपनियों को 67,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है, जबकि राज्य का कुल बजट अभी भी 58,000 करोड़ रुपये का ही है। इसलिए राज्य सरकार अपने स्वतंत्र संसाधनों को बढ़ाने पर जोर देगी, जिससे आर्थिक मजबूती आ सके।
बजट सत्र 28 मार्च तक जारी, दो दिन और होगी कार्यवाही
विधानसभा का बजट सत्र 28 मार्च तक चलेगा। बजट पारित होने के बाद अब सिर्फ दो दिन की कार्यवाही शेष है, जिसमें अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतियों पर चर्चा होगी।