शिमला: हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग ने 10 से कम विद्यार्थियों वाले 330 स्कूलों को बंद करने की तैयारी कर ली है। यह कदम प्राथमिक शिक्षा में सुधार और संसाधनों के सही उपयोग के लिए उठाया जा रहा है। विभाग ने इन स्कूलों की रिपोर्ट सरकार को भेज दी है, जिसमें इनकी भौगोलिक स्थिति और विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर बंद किए जाने की सिफारिश की गई है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को इस प्रस्ताव को भेजा है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 550 स्कूल ऐसे हैं जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 10 से भी कम है। इनमें से 330 स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इनमें से कई स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षकों की संख्या छात्रों से अधिक है।
भौगोलिक स्थिति और विकल्पों का अध्ययन
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार रिपोर्ट में भौगोलिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे स्कूलों को बंद किया जाएगा जिनके विद्यार्थी नजदीकी स्कूलों में आसानी से स्थानांतरित हो सकते हैं। वहीं, ऐसे स्कूल जो दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं और जहां अन्य स्कूलों तक पहुंचना मुश्किल है, उन्हें बंद नहीं किया जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ स्कूलों को दूसरे स्कूलों के साथ मर्ज किया जा सकता है। विभाग का मानना है कि इस कदम से विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं और शिक्षण का स्तर मिल सकेगा।
2025 तक बड़े पैमाने पर सुधार की योजना
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया राज्य में स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए उठाया गया कदम है। विभाग ने 2025 तक शिक्षा के ढांचे में बड़े बदलाव लाने का लक्ष्य रखा है।
शिक्षा मंत्री का बयान
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा, “सरकार का प्रयास है कि हर छात्र को बेहतर शिक्षा मिले। ऐसे स्कूल जहां छात्र संख्या बेहद कम है, उन्हें बंद कर बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है।”
लंबे समय से चर्चा में थी योजना
इस योजना पर पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही थी। शिक्षा विभाग को यह शिकायतें मिली थीं कि छोटे स्कूलों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं और शिक्षण स्तर में गिरावट हो रही है।
प्रभावित जिलों की सूची तैयार
सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया से शिमला, मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, चंबा, और सिरमौर जिलों के स्कूल सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
प्रमुख बिंदु:
10 से कम विद्यार्थियों वाले 330 स्कूल होंगे बंद।
भौगोलिक स्थिति का विशेष ध्यान।
2025 तक शिक्षा सुधार की बड़ी योजना।
प्रभावित जिलों में शिमला, मंडी, और कांगड़ा मुख्य केंद्र।
लंबी अवधि के लाभ:
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शिक्षकों और संसाधनों का सही उपयोग भी सुनिश्चित होगा।