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नशे के कारोबार में 105 सरकारी कर्मी शामिल: हिमाचल में एनडीपीएस के तहत बड़ी कार्रवाई, 11 बर्खास्त

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नशे के कारोबार में 105 सरकारी कर्मी शामिल होने का खुलासा हिमाचल प्रदेश में उस समय हुआ, जब प्रदेश सरकार ने नशा तस्करी के खिलाफ चल रही मुहिम के आंकड़े सार्वजनिक किए। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह सरकारी कर्मचारी ही क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।

प्रदेश में नशा तस्करी और नशे के सेवन पर सख्त रुख अपनाते हुए अब तक छह राज्य कर्मचारियों और पांच पुलिस कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। यह कार्रवाई एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के आधार पर की गई है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

105 सरकारी व पुलिस कर्मी एनडीपीएस के घेरे में

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 105 सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किए गए हैं। इनमें

  • 16 पुलिस कर्मचारी,
  • 71 राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारी,
  • 18 बैंक एवं केंद्रीय कर्मचारी शामिल हैं।

इन सभी पर नशा सेवन, नशा तस्करी या नशे से जुड़ी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप हैं। गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है। नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है और दोषी पाए जाने पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

पुलिस और प्रशासन पर भी सख्त नजर

नशे के कारोबार में सरकारी कर्मियों की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि इसी कारण आंतरिक जांच को तेज किया गया है और विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “जो पुलिस कर्मी कानून के रक्षक हैं, अगर वही कानून तोड़ेंगे तो उनके खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई जरूरी है।”

अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर

नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों के खिलाफ सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनकी अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में एनडीपीएस अधिनियम के आरोपियों द्वारा सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण और अवैध निर्माण के 72 मामले सामने आए हैं।
इनमें से 14 मामलों में कार्रवाई पूरी कर ली गई है, जबकि 58 मामले अभी विभिन्न राजस्व प्राधिकरणों, एनएचआई और उच्च न्यायालय में लंबित हैं।

अब तक सोलन, कांगड़ा, नूरपुर, पुलिस जिला देहरा और पुलिस जिला बद्दी में

  • 12 संपत्तियां खाली या ध्वस्त,
  • 2 संपत्तियां सील की जा चुकी हैं।

राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अवैध निर्माण हटाने की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और किसी भी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सरकार का संदेश साफ

प्रदेश सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि नशे के खिलाफ यह अभियान लंबा चलेगा। न केवल तस्करों पर, बल्कि नशे में लिप्त सरकारी कर्मचारियों पर भी नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं और बर्खास्तगी की संख्या बढ़ सकती है।