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हिमाचल की 3,758 ग्राम पंचायतों पर 16वें वित्त आयोग की ग्रांट का संकट, केंद्र ने रखीं 4 बड़ी शर्तें

हिमाचल की 3,758 ग्राम पंचायतों पर 16वें वित्त आयोग की ग्रांट का संकट, केंद्र ने रखीं 4 बड़ी शर्तें

हिमाचल प्रदेश की 3,758 ग्राम पंचायतों को 16वें वित्त आयोग की अनुदान राशि मिलने से पहले केंद्र सरकार ने चार महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। जानिए किन कारणों से ग्रांट अटक सकती है और किस जिले की क्या स्थिति है।

शिमला: हिमाचल प्रदेश की 3,758 ग्राम पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि पर फिलहाल अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित वित्तीय और प्रशासनिक शर्तें पूरी करने के बाद ही पंचायतों को ग्रांट जारी की जाएगी। ऐसे में राज्य की सैकड़ों पंचायतों को लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करना होगा।

ग्रांट जारी करने से पहले पूरी करनी होंगी ये 4 अहम शर्तें

केंद्र सरकार ने पंचायतों को 16वें वित्त आयोग की राशि जारी करने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य की हैं—

इन सभी शर्तों के पूरा होने के बाद ही संबंधित पंचायतों को अनुदान राशि जारी की जाएगी।

समर्थ पोर्टल पर अधिकांश पंचायतों का काम अधूरा

पंचायती राज विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि राज्य की अधिकांश पंचायतें अभी भी समर्थ पोर्टल पर पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाई हैं।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार—

इन जिलों में करदाता पंजीकरण सबसे अधिक लंबित

करदाता पंजीकरण के आंकड़े भी कई जिलों में चिंता बढ़ाने वाले हैं।

वहीं सोलन की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है, जहां केवल 5.84% करदाता ही पंजीकरण का इंतजार कर रहे हैं।

सभी जिलों को जारी किए गए निर्देश

पंचायती राज विभाग ने सभी जिला प्रशासन और विकास खंड अधिकारियों (बीडीओ) को लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का उद्देश्य पंचायतों में टैक्स संग्रह, लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल बनाना है, ताकि 16वें वित्त आयोग की अनुदान राशि समय पर जारी हो सके।

मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने क्या कहा?

पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सभी बीडीओ को एक सप्ताह के भीतर लंबित कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों को समर्थ पोर्टल पर आवश्यक जानकारी अपडेट करने और वित्तीय प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने के लिए कहा गया है, जिससे केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि में किसी प्रकार की देरी न हो।

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