‘HIM’ ब्रांड के तहत हिमाचल के डेयरी उत्पाद अब बाजार में उतारे जाएंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को कहा कि राज्य में तैयार होने वाले दूध और उससे बने उत्पादों को “HIM” ब्रांड के तहत मार्केट किया जाएगा। इससे दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी और प्रदेश के किसानों को नए रोजगार के अवसर मिलेंगे। 🐄🥛
मुख्यमंत्री ने यह बात उस समय कही जब हिमाचल प्रदेश सरकार और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के बीच डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
कांगड़ा मिल्क यूनियन के गठन पर समझौता
पहला MoU कांगड़ा मिल्क यूनियन के गठन और संचालन से जुड़ा है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में दूध संग्रहण और विपणन प्रणाली को मजबूत करना है। इससे दुग्ध उत्पादकों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है।
दो नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट होंगे स्थापित
दूसरे समझौते के तहत राज्य में दो नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
- नाहन (जिला सिरमौर) में 20,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता का प्लांट
- नालागढ़ (जिला सोलन) में 20,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता का प्लांट
इसके साथ ही दूध को सुरक्षित रखने के लिए दो मिल्क चिलिंग सेंटर भी बनाए जाएंगे।
- जलाड़ी (जिला हमीरपुर) – 20,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता
- झलेरा (जिला ऊना) – 20,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता
इन परियोजनाओं से राज्य के डेयरी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
Milkfed में लागू होगा ERP सिस्टम
तीसरे MoU के तहत हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड में एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सॉफ्टवेयर लागू किया जाएगा। इससे दूध संग्रहण, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा।
डगवार डेयरी परियोजना को भी मिलेगा बल
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार ने 2023 में NDDB के साथ डगवार डेयरी परियोजना को विकसित करने के लिए समझौता किया था।
उन्होंने कहा, “इस समझौते का उद्देश्य दूध प्रसंस्करण और उससे जुड़े बायो-प्रोडक्ट्स में विश्वस्तरीय तकनीक लाना है। साथ ही मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट्स को कंप्यूटरीकृत गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली से मजबूत किया जाएगा।”
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने से किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ेगी। ‘HIM’ ब्रांड के जरिए हिमाचल के डेयरी उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की योजना है।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

