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‘दुनिया की सबसे धीमी निर्माण गति’ से बन रहे हाईवे पर खतरा बरकरार: परेल घार में स्कॉर्पियो पर पत्थर गिरा, बाल-बाल बची जान

‘दुनिया की सबसे धीमी निर्माण गति’ से बन रहे हाईवे पर खतरा बरकरार: परेल घार में स्कॉर्पियो पर पत्थर गिरा, बाल-बाल बची जान

दुनिया की सबसे धीमी निर्माण गति से बन रहे चम्बा–पठानकोट नेशनल हाईवे पर एक बार फिर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मंगलवार देर शाम इस हाईवे के अत्यंत संवेदनशील हिस्से परेल घार में पहाड़ी से अचानक एक भारी पत्थर लुढ़ककर चलती स्कॉर्पियो पर गिर गया। पत्थर गिरने से वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन गनीमत यह रही कि स्कॉर्पियो में सवार सभी यात्री सुरक्षित रहे और कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कॉर्पियो चम्बा से पठानकोट की ओर जा रही थी। जैसे ही वाहन परेल घार के लंबे और खतरनाक हिस्से में पहुंचा, तभी ऊपर से एक बड़ा पत्थर टूटकर सीधे गाड़ी पर आ गिरा। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कुछ पल के लिए हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास से गुजर रहे अन्य वाहन भी तुरंत रुक गए और यात्रियों की मदद के लिए स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि परेल घार चम्बा–पठानकोट हाईवे का सबसे जोखिम भरे हिस्सों मे से एक है। यह घार सड़क के काफी लंबे हिस्से में फैली हुई है, जहां हर समय पत्थर गिरने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यहां पत्थर गिरना आम बात है। कभी छोटा पत्थर, कभी बड़ा। आज किस्मत अच्छी थी कि जान बच गई, लेकिन हर बार ऐसा हो, इसकी गारंटी नहीं है।”

हादसे में स्कॉर्पियो को भारी नुकसान पहुंचा है। वाहन का ऊपरी हिस्सा और शीशे क्षतिग्रस्त हुए हैं। वाहन में सवार एक यात्री ने बताया, “हम कुछ समझ पाते, उससे पहले ही ऊपर से पत्थर आ गिरा। ऐसा लगा जैसे मौत सामने खड़ी हो। भगवान का शुक्र है कि सभी सुरक्षित हैं।”

इस घटना ने एक बार फिर ‘दुनिया की सबसे धीमी निर्माण गति’ से बन रहे चम्बा–पठानकोट नेशनल हाईवे की सच्चाई को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस सड़क को नेशनल हाईवे बने कई साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं। न तो पहाड़ियों की सुरक्षित कटिंग हुई है और न ही पत्थर गिरने से बचाव के लिए स्थायी इंतजाम किए गए हैं।

लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य समय पर और सही तरीके से पूरा किया गया होता, तो आज परेल घार जैसे खतरनाक हिस्सों में आधुनिक तकनीक से सुरक्षा उपाय मौजूद होते। एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह हाईवे शायद दुनिया का सबसे धीमी निर्माण गति से बनने वाला हाईवे बन गया है। सालों से काम चल रहा है, लेकिन खतरे आज भी वैसे ही हैं।”

स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि परेल घार में बरसात और सर्दियों के मौसम में खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हल्की बारिश या हवा चलने पर भी पत्थर सड़क पर गिर जाते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अब तक केवल अस्थायी उपाय ही किए गए हैं।

हादसे के बाद कुछ समय के लिए चम्बा–पठानकोट हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा। बाद में क्षतिग्रस्त वाहन को सड़क से हटाकर मार्ग को बहाल किया गया। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों ने मांग की है कि परेल घार सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर तुरंत स्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।

लोगों का कहना है कि अगर दुनिया की सबसे धीमी निर्माण गति से चल रहे इस हाईवे के काम में तेजी नहीं लाई गई और सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो भविष्य में कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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