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कस्तूरबा गांधी स्कूल हिमगिरि की पूर्व छात्रा मधु चौहान अब संभालेगी प्रबंधन की कमान

कस्तूरबा गांधी स्कूल हिमगिरि की पूर्व छात्रा मधु चौहान अब संभालेगी प्रबंधन की कमान

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हिमगिरि से जुड़ी यह खबर आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। कस्तूरबा गांधी स्कूल हिमगिरि की पूर्व छात्रा चंपा कली उर्फ मधु चौहान ने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो सैकड़ों बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। जिस विद्यालय में उन्होंने कभी एक साधारण छात्रा के रूप में पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी KGBV हिमगिरि में वे सहायक वार्डन के पद पर तैनात होकर प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं।

हिमाचल प्रदेश के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली मधु चौहान की कहानी संघर्षों से भरी रही है। उनके पिता बलदेव पेशे से मिस्त्री हैं, जबकि माता बबली गृहिणी हैं। सीमित आमदनी और संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। मधु ने भी परिस्थितियों को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और पढ़ाई के प्रति अपनी लगन बनाए रखी।

मजदूरी से गोल्ड मेडल तक का सफर

कस्तूरबा गांधी स्कूल हिमगिरि की पूर्व छात्रा मधु चौहान की शैक्षणिक उपलब्धियाँ किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं हैं। 12वीं कक्षा में उन्होंने मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें लैपटॉप और छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एम.ए. (2020–22) किया और अपने पूरे बैच में टॉपर रहकर गोल्ड मेडल हासिल किया।

शिक्षा के साथ-साथ मधु की प्रतिभा बहुआयामी रही है। आर्ट एंड क्राफ्ट, कंप्यूटर शिक्षा और खेलकूद में भी उन्होंने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय स्तर पर उनकी सक्रिय भागीदारी और अनुशासन ने शिक्षकों को भी प्रभावित किया।

हॉस्टल जीवन बना टर्निंग पॉइंट

मधु चौहान बताती हैं कि KGBV हिमगिरि का छात्रावास उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा। हॉस्टल में रहते हुए उन्होंने विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमियों से आई छात्राओं के साथ समय बिताया। इससे उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ।
मधु अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ-साथ दादा-दादी को देती हैं, जिन्होंने हर मुश्किल घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अब बेटियों के भविष्य की जिम्मेदारी

आज कस्तूरबा गांधी स्कूल हिमगिरि की पूर्व छात्रा मधु चौहान उसी विद्यालय में सहायक वार्डन के रूप में कार्यरत हैं, जहां से उनका सफर शुरू हुआ था। उनकी जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे छात्राओं के मार्गदर्शन, अनुशासन और सर्वांगीण विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
विद्यालय की छात्राएं उन्हें केवल अधिकारी नहीं, बल्कि अपना रोल मॉडल मानती हैं। मधु का मानना है कि यदि बेटियों को सही वातावरण, सुरक्षा और अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहेंगी।

शिक्षा से सशक्तिकरण की मिसाल

जिला समन्वयक डॉ. कविता बिजलवान ने मधु की उपलब्धि पर कहा,
“मधु चौहान की मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास प्रशंसनीय है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी संस्थाएँ बेटियों को सुरक्षित वातावरण और अवसर प्रदान करती हैं, जिससे वे समाज में अपनी अलग पहचान बना सकें।”

मधु चौहान की यह उपलब्धि न केवल KGBV हिमगिरि के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की बेटियों के लिए एक मजबूत संदेश भी है कि मेहनत और शिक्षा के बल पर कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

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