शिमला, 16 जुलाई। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे एसडीएम ऊना विश्व मोहन देव चौहान को फिलहाल अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान करने से इंकार कर दिया है। न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की खंडपीठ ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
पीड़िता के आरोप
याचिका में दर्ज तथ्यों के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि 10 अगस्त 2025 को आरोपी अधिकारी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद 20 अगस्त 2025 को उसे विश्राम गृह में बुलाकर दोबारा दुष्कर्म किया गया। आरोप यह भी है कि आरोपी ने घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे वायरल करने की धमकी दी।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने पहले उससे शादी का वायदा किया था और इसी भरोसे में उसने संपर्क बनाए रखा। लेकिन बार-बार दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने की धमकी मिलने पर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
कोर्ट का रुख
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों को नज़रअंदाज़ करने का कोई कारण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में गिरफ्तारी से पहले जमानत प्रदान करना उचित नहीं है।
अगली कार्रवाई
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले की जांच रिपोर्ट तलब की है। अब यह देखना होगा कि शुक्रवार को सुनवाई के दौरान आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर क्या निर्णय लिया जाता है।

