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सरकार ने FCI चावल को एथेनॉल उत्पादन के लिए डिस्टिलरीज़ को बेचने की अनुमति दी, कीमत ₹2,800 प्रति क्विंटल

सरकार ने FCI चावल को एथेनॉल उत्पादन के लिए डिस्टिलरीज़ को बेचने की अनुमति दी, कीमत ₹2,800 प्रति क्विंटल

नई दिल्ली: खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादकों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) [OMSS (D)] नीति 2024-25 के तहत चावल की बिक्री के लिए आरक्षित मूल्य में बदलाव किया है। अब एथेनॉल उत्पादन के लिए डिस्टिलरीज को FCI चावल ₹2,800 प्रति क्विंटल की फिक्स्ड कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह फैसला 31 मार्च 2025 तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।


मुख्य बिंदु:

  1. एथेनॉल डिस्टिलरीज के लिए चावल की बिक्री:
    • यह चावल उन डिस्टिलरीज को बेचा जाएगा जो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ पंजीकृत हैं।
    • डिस्टिलरीज को OMCs के साथ हस्ताक्षरित अनुबंध की प्रति प्रस्तुत करनी होगी।
    • FCI चावल की मात्रा OMCs के अनुबंध में आवंटित एथेनॉल की मात्रा के अनुसार दी जाएगी।
  2. चावल की बिक्री की प्रक्रिया:
    • डिस्टिलरीज FCI डिपो से चावल प्राप्त कर सकती हैं।
    • OMCs हर महीने FCI को एथेनॉल उत्पादन और वितरण का विवरण भेजेंगी।
  3. चावल की कीमत:
    • एथेनॉल उत्पादन के लिए ₹2,800 प्रति क्विंटल
    • निजी व्यापारियों, सहकारी समितियों और राज्य सरकारों के लिए भी यही कीमत।
    • सामुदायिक रसोई और सहकारी संगठनों के लिए ₹2,400 प्रति क्विंटल।

2023 की पाबंदी और नई नीति:

2023 में एथेनॉल डिस्टिलरीज पर चावल बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, अगस्त 2024 में सरकार ने यह प्रतिबंध हटा लिया और 23 लाख टन चावल को OMSS के तहत ई-नीलामी के माध्यम से बेचने की अनुमति दी। लेकिन वित्तीय व्यवहार्यता की कमी के कारण एथेनॉल निर्माताओं ने इस योजना में रुचि नहीं दिखाई।


अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए चावल की कीमतें:

  1. निजी व्यापारी/सहकारी संगठन:
    • ई-नीलामी के माध्यम से बिक्री कीमत ₹2,800 प्रति क्विंटल।
  2. सामुदायिक रसोई और सहकारी संस्थाएं:
    • “भारत” ब्रांड के तहत बिक्री के लिए कीमत ₹2,400 प्रति क्विंटल।
  3. राज्य सरकारें और राज्य निगम:
    • बिना नीलामी के ₹2,800 प्रति क्विंटल।

सरकार का उद्देश्य और प्रभाव:

सरकार की इस पहल का उद्देश्य एथेनॉल उत्पादन में वृद्धि करना और रिन्यूएबल एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह कदम चावल के अतिरिक्त भंडार का सही उपयोग सुनिश्चित करेगा।

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