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न नुआचडी का घूमता फेर,न चोली डोरे वाले गद्दियों का डंडारस और समाप्त हुईं भरमौर की जातरें

रोजाना24,चम्बा : जन्माष्ट्मी पर्व से शुरू होने वाली भरमौर की सात दिवसीय जातरें आज समाप्त हो गयीं.

कोरोना के कारण लगी विभिन्न प्रकार की बंदिशों के कारण यह जातरें कब शुरू हुईं कब खत्म पता ही न चला.आज 18 अगस्त को सातवीं और जातर थी। आपसी भाई चारे व सांस्कृतिक मिलन की प्रतीक इन जातरों में केवल पारम्परिक रस्में व धार्मिक गतिविधियां ही की गयीं। भरमौर स्थित चौरासी मंदिर परिसर में आज सातवीं जातर जिसे ‘मोट्टी जातर’ कहा जाता है, आयोजित की गयीं दशनामी अखाडा भरमौर से देव छड़ियों को चामुंडा माता मंदिर की यात्रा करवाकर परिसर के खुले प्रांगण में रखकर उनके सामने ‘जातर’ शुरू की गयी। हर वर्ष की भांति इस वर्ष लोग जातर में हिस्सा लेने व देखने नहीं पहुँच पाए। स्थानीय लोगों ने शारीरिक दूरी रखते हुए गद्दी महिला पुरुषों ने थोड़ी देर अपना नृत्य कर परम्परा का निर्वहन किया। न तो महिलाएं नुआचडी व आभूषणों से सुसज्जित होकर ‘डंगी’ नृत्य करने पहुंची व न ही पुरुष चोली डोरे के परिधान में। केवल 2-4 स्थानीय लोग ही चोली  पहन कर 84 परिसर में डंडारस करने पहुंचे थे।

लोगों ने इस  वर्ष को अशुभ करार देते हुए भगवान शिव से कोरोना महामारी जैसा ऐसा वक्त कभी न लाने की प्रार्थना की.

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